आगरा। बाल एवं महिला विकास शोषण निवारण कल्याण समिति की प्रबंध सचिव श्रीमती रानू निगम ने कहा है कि वर्षों से कोई भी राजनीतिक दल महिलाओं के कल्याण के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भले ही महिलाओं के लिए योजनाओं का वादा किया जाता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन पर कोई काम नहीं किया जाता। परिणामस्वरूप संपूर्ण भारत की महिलाएँ अब तक अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं।
रानू निगम ने कहा, “चाहे विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, हर बार महिला कल्याण की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन चुनाव के बाद वादों को भूल जाना राजनीतिक दलों की आम नीति बन गई है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए हर महीने 5 किलो फ्री राशन वितरण कार्यक्रम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इससे देश की गरीब महिलाएँ अपना पेट पाल सकती हैं। उनका कहना है कि यदि कुछ देना ही है, तो इसके बजाय प्रधानमंत्री को महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार निशुल्क उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही हर प्रकार की महिला चिकित्सकीय सेवाएँ भी निशुल्क करनी चाहिए ताकि महिलाएँ सशक्त बन सकें और देश प्रगति की राह पर अग्रसर हो।
रानू निगम ने हाल ही में जज पर जूता फेंकने की घटना की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल शर्मनाक है, बल्कि पूरी विश्व समुदाय के सामने देश की छवि धूमिल करने वाली है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस प्रकार के आरोपी को तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति द्वारा कठोर सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई ऐसा कदम न उठाए।
बिहार विधानसभा चुनाव पर भी टिप्पणी करते हुए रानू निगम ने कहा कि सभी राजनीतिक दल अपना दमखम लगा रहे हैं, लेकिन किसी ने जनता से यह नहीं पूछा कि सत्ता में आने के बाद वे किस प्रकार योजनाओं का लाभ महिलाओं और आम जनता तक पहुँचाएँगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देंगी, तो अन्य योजनाओं का कोई सार्थक प्रभाव नहीं होगा।

