ज़मीनी नेताओं को साथ लेकर चलने की जरूरत, कार्यकर्ताओं ने संगठन को लेकर जताई चिंता
कन्नौज। समाजवादी पार्टी को कन्नौज में संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए राजपाल कश्यप के तीन दिवसीय दौरे के बाद पार्टी के अंदर ही चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का कहना है कि जिस उद्देश्य से दौरा किया गया था, उसके मुकाबले अपेक्षित संगठनात्मक परिणाम नजर नहीं आए। कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ जमीनी नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने से असंतोष बढ़ा है।
सबसे अधिक चर्चा छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र को लेकर हो रही है, जहां वरिष्ठ सपा नेता और पूर्व विधायक ताहिर हुसैन सिद्दीकी की भूमिका को लेकर कार्यकर्ताओं में सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नेताओं का कहना है कि ताहिर हुसैन सिद्दीकी लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उनका विभिन्न वर्गों में जनसंपर्क रहा है।
कार्यकर्ताओं के एक वर्ग का मानना है कि संगठन को मजबूत करने के लिए ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना जरूरी है, जिनकी क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही है। उनका कहना है कि यदि जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं की उपेक्षा होती है तो इसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ सकता है।
गुरसहायगंज सहित आसपास के क्षेत्रों में भी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच संगठन की रणनीति को लेकर चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल दौरे और बैठकों से संगठन मजबूत नहीं होता, बल्कि इसके लिए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और जनता के साथ लगातार संवाद आवश्यक है।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि समाजवादी पार्टी का नेतृत्व कन्नौज में संगठन के भीतर उठ रही इन चर्चाओं को किस तरह लेता है और आने वाले समय में जमीनी नेताओं को संगठन में किस तरह की भूमिका दी जाती है।
फिलहाल, राजपाल कश्यप का दौरा संगठन को कितना मजबूत कर पाया और पार्टी के भीतर उठ रही नाराजगी का आने वाले समय में क्या असर होगा , यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
