मस्जिद नहर वाली में जुमा के खुत्बे में सब्र, इंसाफ और अमन का संदेश
आगरा। मस्जिद नहर वाली के खतीब मोहम्मद इकबाल ने शुक्रवार की नमाज़ से पहले अपने खुत्बे में मौजूदा सामाजिक परिस्थितियों पर कुरआन और हदीस की रोशनी में विस्तार से बात की। उन्होंने लोगों से सब्र, संयम और इंसाफ के सिद्धांतों पर कायम रहने की अपील की।
खतीब मोहम्मद इकबाल ने सूरह इब्राहीम, आयत 42 का हवाला देते हुए कहा कि लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि ज़ालिमों के अत्याचारों से अल्लाह बेखबर है। अल्लाह अत्याचारियों को एक निश्चित समय तक मोहलत देता है, लेकिन उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के यहां हर अमल का हिसाब है और किस व्यक्ति को कब तक मोहलत देनी है, यह उसी के इल्म में है। उन्होंने सूरह अल-अंबिया, आयत 47 का उल्लेख करते हुए कहा कि अत्याचार करने वालों को जल्द पता चल जाएगा कि उनका अंजाम क्या है।
मोहम्मद इकबाल ने कहा कि किसी भी अन्याय या कार्रवाई के जवाब में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय लोगों को सब्र और संयम से काम लेना चाहिए। अल्लाह तबारक व तआला कयामत के दिन पूरी तरह इंसाफ करेगा।
उन्होंने सूरह अल-बकरा, आयत 114 का हवाला देते हुए कहा कि उन लोगों से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह की मस्जिदों में उसका नाम लेने से रोकते हैं और उन्हें वीरान करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस्लाम ने सदियों पहले उस जाहिलियत को खत्म किया जिसमें इंसान के साथ उसके नाम, नस्ल या पहचान के आधार पर भेदभाव किया जाता था। इस्लाम इंसाफ, इंसानियत और धार्मिक स्थलों के सम्मान की शिक्षा देता है।
खतीब ने कहा कि मस्जिद, मंदिर, गिरजाघर, यहूदी इबादतगाह या किसी भी समुदाय के धार्मिक स्थल का सम्मान और सुरक्षा समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में किया गया अत्याचार अस्थायी है, लेकिन अल्लाह की पकड़ बेहद सख्त है।
अपने खुत्बे के अंत में उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तबारक व तआला हम सभी और हमारे हुक्मरानों को सही समझ, इंसाफ और सूझ-बूझ अता फरमाए तथा समाज में अमन और भाईचारा कायम रखे। आमीन।
