नई दिल्ली, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) ने बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी राज्य में तीसरे मोर्चे के गठन की योजना बना रहे हैं। AIMIM इस बार 100 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छुक है और खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों और सीमांचल (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार) पर फोकस कर रही है।
पार्टी का कहना है कि उसका लक्ष्य रोजगार, शिक्षा, मुस्लिम समुदाय के मुद्दे और सामाजिक न्याय पर ध्यान केंद्रित करना है। ओवैसी की बेबाक बयानबाजी और समाज के कमजोर वर्गों के लिए आवाज उठाने की रणनीति पार्टी की पहचान बन चुकी है।
AIMIM महागठबंधन में शामिल हो सकती है और कम सीटों पर समझौता करने के लिए भी तैयार है, लेकिन उसकी शर्त यह है कि सीमांचल की अहम सीटें उसे मिलें। यदि गठबंधन में सहमति नहीं बनी, तो पार्टी अकेले या किसी तीसरे मोर्चे के साथ चुनाव लड़ सकती है।
पार्टी के अनुसार बिहार में 47 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इनमें 11 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 40% से अधिक हैं, जबकि सीमांचल इलाके में मुस्लिम आबादी 40-70% के बीच है। AIMIM का मानना है कि राज्य में मुसलमान और दलितों के साथ अन्याय हुआ है और उसकी आवाज इस वर्ग के हितों की सबसे मजबूत आवाज है।
साल 2020 में AIMIM ने बिहार की 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब पार्टी 50 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, जिससे राज्य में सियासी समीकरण बदल सकते हैं और मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो सकता है।

