20 साल बाद दर्ज हुई रिपोर्ट, 21 महीने में करीब 40 सुनवाई
अधिवक्ता नरेश पारस की पैरवी में जारी है कानूनी लड़ाई
दो दशक पहले हुए एसिड अटैक की पीड़ा झेल रही रूकैया की इंसाफ की लड़ाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में नया मोड़ आया है। आरोपी आरिफ की ओर से दाखिल जमानत अर्जी को उसके अधिवक्ता ने वापस लेने की मांग की। हाईकोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को आवेदन को वापस लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया। अदालत के आदेश में स्पष्ट है कि जमानत अर्जी को उसके अधिवक्ता की मांग पर वापस लिया गया था। मामला वर्ष 2002 की उस घटना से जुड़ा है, अलीगढ़ में जब बहन के देवर आरिफ ने करीब 14 वर्षीय रूकैया पर एसिड डालकर उसके चेहरे और शरीर को झुलसा दिया। घटना 7 सितंबर 2002 की है, जबकि पीड़िता ने 26 अप्रैल 2023 को आरोपी आरिफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। घटना के समय वह नाबालिग थी और पारिवारिक दबाव के कारण उस समय रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट ने मामले को बताया था बहुत दुर्लभ
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 5 मार्च 2025 के आदेश में मामले के तथ्यों को बहुत दुर्लभ बताया था। अदालत के रिकॉर्ड में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर रूकैया के चेहरे, गर्दन, सीने और हाथ पर गंभीर जलने की चोटों का उल्लेख किया गया है। मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट 7 सितंबर 2002 की बताई गई है और इसे केस डायरी का हिस्सा बताया गया है। अदालत ने यह भी माना कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। जमानत प्रार्थना पत्र पर अंतिम आदेश पारित करने से पहले हाईकोर्ट ने पीड़िता को सुनवाई का अवसर देना जरूरी माना और संबंधित थाना प्रभारी को जमानत अर्जी की प्रति पीड़िता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
हादसे में घायल हुए, फिर भी नहीं रुकी पैरवी
रूकैया की विधिक पैरवी आगरा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस कर रहे हैं। रूकैया को इलाहाबाद हाईकोर्ट ले जाते समय कानपुर में बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में अधिवक्ता नरेश पारस घायल हो गए। इसके बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई नहीं छोड़ी। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह दोबारा रूकैया को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और सुनवाई में पैरवी जारी रखी। पैरवी के दौरान अधिवक्ता विपिन चंद्र पाल ने हाईकोर्ट में पीड़िता की ओर से पक्ष रखा। पिछले करीब 21 महीनों में लगभग 40 सुनवाइयां हो चुकी हैं। लंबे समय से चल रही इस कानूनी प्रक्रिया में पीड़िता की ओर से लगातार न्यायालय में अपना पक्ष रखा जा रहा है।
20 साल बाद दर्ज हुई रिपोर्ट
रूकैया के मामले में घटना के करीब 20 वर्ष बाद तत्कालीन एडीजी राजीव कृष्ण के आदेश के बाद मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई और इसके बाद प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा। अधिवक्ता नरेश पारस ने रूकैया को सरकार से पांच लाख रुपये का मुआवजा भी दिलाया है। अब उनका कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने और मुकदमे में कानून के अनुसार सजा सुनिश्चित कराने के लिए अदालत में मजबूत पैरवी जारी रखी जाएगी।
जमानत मामले में हाईकोर्ट का ताजा आदेश
28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में आरोपी आरिफ के अधिवक्ता राकेश कुमार मौर्य ने कहा कि वह जमानत आवेदन को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और उसे वापस लेने की अनुमति चाहते हैं। हाईकोर्ट ने आवेदन को विड्रां मानते हुए खारिज कर दिया। अब मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही और मूल आपराधिक मुकदमे में होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें हैं।
एसिड अटैक के दर्द से आत्मनिर्भरता तक पहुंची रूकैया
रूकैया के लिए यह लड़ाई केवल अदालत तक सीमित नहीं है। हादसे के बाद जीवन में आए संघर्षों के बावजूद वह आज अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। रूकैया वर्तमान में छांव फाउंडेशन द्वारा संचालित शीरोज हैंगआउट कैफे, आगरा में काम कर रही है, जहां वह रोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
