संवाद – विनोद मिश्रा
बांदा। सिंचाई विभाग की तकनीकी समिति ने 115 वर्ष पुराने बरियारपुर बांध की मरम्मत से इंकार कर दिया हैं। कमेटी ने केंद्रीय जल आयोग को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि बांध की मरम्मत कराना खतरे से खाली नहीं है। इसकी क्षमता घटती जा रही है।
अब डाउन स्ट्रीम पर नया बांध बनाने की जरूरत है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा है। बारिश का मौसम खत्म होने पर कभी भी केंद्रीय टीम आकर बांध का निरीक्षण कर सकती है।
बरियारपुर बांध की क्षमता 12.50 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) है। इससे मुख्य केन नहर निकली है। इसी बांध की मदद से जिले में लगभग 1100 किमी नहरों से सिंचाई की जाती है। केन नदी पर लगभग 650 मीटर लंबी दीवार है। इसके अंदर सुरंगनुमा रास्ता है। दीवार के ऊपर 8.23 फीट लंबे, फीट फीट चौड़े और फीट फीट ऊंचे भारी भरकम लोहे के फाटक लगे हैं।
इन्हीं को खड़ा करके पानी रोका जाता है। बारिश में जब बांध उफान मारता है, तब इसकी दीवार से लाखों क्यूसेक पानी बहता है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता का कहना है कि बरियारपुर,पारीक्षा और बरूवा सागर बांध जर्जर हैं। विभाग मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च करता है। केन-बेतवा परियोजना के तहत इस बांध को भी नया बनाने के लिए रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग को भेजी है। अब बारिश के बाद केंद्रीय जल आयोग की टीम कभी भी बांध का सर्वे करने आ सकती है।

