लखनऊ, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म ख़ान ने शुक्रवार को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनके लखनऊ स्थित आवास पर मुलाक़ात की। यह मुलाक़ात क़रीब 30 मिनट तक चली और मौजूदा राजनीतिक हालात में इसे ख़ास महत्व दिया जा रहा है। बैठक के बाद आज़म ख़ान ने कहा कि वह अपने, अपने परिवार और समर्थकों के साथ हुए अन्याय की कहानी साझा करने आए थे।
आज़म ख़ान ने कहा, “हमने एक-दूसरे से दिल की बात की। जब दो समान विचारधारा वाले लोग मिलते हैं तो अर्थपूर्ण बातचीत होना स्वाभाविक है। हमारे साथ जो अन्याय हुआ, वह किसी और के साथ न हो — बस यही चाहते हैं। हम अदालतों से न्याय और सभी एजेंसियों से निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं।”
आज़म ख़ान ने संकेत दिया कि वह आगे की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएँगे। उन्होंने कहा, “2027 में बदलाव की लहर आएगी और मैं उस लहर का हिस्सा बनूँगा।”
बिहार में ‘जंगल राज’ को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर तंज़ करते हुए उन्होंने कहा:
“वहाँ जंगल राज कहा जा रहा है, लेकिन जंगलों में तो इंसान रहता ही नहीं। मैं वहाँ कैसे जाऊँ? मैं जानबूझकर रेल की पटरी पर सिर नहीं रख सकता।”
उनके इस बयान को वर्तमान हालात पर प्रतीकात्मक टिप्पणी के रूप में देखा गया।
अखिलेश यादव ने इस मुलाक़ात को भावनात्मक बताया। उन्होंने कहा, “आज जब वे हमारे घर आए तो कितनी यादें ताज़ा हो गईं। यह मुलाक़ात हमारी साझी विरासत और साथ चलने की पहचान है।”
इस मुलाक़ात को सपा के आंतरिक संदेश और आने वाले चुनावी समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

