दिल्ली | बिहार विधानसभा चुनाव में RJD की करारी हार के बाद पार्टी ही नहीं, पूरा लालू परिवार भी भीतर से बिखरता हुआ नज़र आ रहा है। इस टूटन का सबसे भारी बोझ लालू प्रसाद यादव को किडनी देकर जीवनदान देने वाली बेटी रोहिणी आचार्या पर पड़ा है।
सिंगापुर रवाना होते हुए रोहिणी ने बेहद भारी मन से कहा—
“अब मैं खुद को इस परिवार का हिस्सा नहीं मानती… मेरा कोई परिवार नहीं है।”
उनके शब्दों में छलकता दर्द पूरे राजनीतिक गलियारे को झकझोर गया।
चुनाव हार पर सवाल… और ‘सवाल पूछने’ की सज़ा?
रोहिणी के मुताबिक हार की समीक्षा से लेकर टिकट चयन तक कई अहम मुद्दों पर उन्होंने परिवार और पार्टी से सवाल पूछे।
लेकिन कहना है कि—
“सवालों का जवाब देने के बजाय मुझे चुप करा दिया गया। आरोप-प्रत्यारोप इतने बढ़े कि मुझे राजनीति से भी दूरी बनानी पड़ी और अपने ही परिवार से भी।”
एक बेटी जिसने अपने पिता के लिए अपना शरीर दांव पर लगा दिया… वही आज आंसुओं में डूबी कह रही है—
“मुझे इस परिवार से बाहर कर दिया गया… मेरा कोई घर नहीं।”
राजनीतिक गलियारों में खामोशी—लेकिन बेचैनी ज़ाहिर
इस पूरे प्रकरण पर सियासत भी असहज दिखी।
JDU नेता अशोक चौधरी बोले—
“यह लालू परिवार का निजी मामला है, लेकिन रोहिणी का दर्द बेहद मार्मिक है। लालू-राबड़ी जी के लिए दुखद स्थिति है।”
BJP नेता राजीव प्रताप रूड़ी का बयान—
“जो हो रहा है वह अच्छे संकेत नहीं हैं। परिवार बिखरने की स्थिति में है।”
रोहिणी का भावनात्मक दर्द—पूरा बयान झकझोर देने वाला
रोहिणी ने सोशल मीडिया पर जो बातें लिखीं, वे दिल दहला देने वाली हैं। उन्होंने कहा—
“कल एक बेटी, एक बहन, एक शादीशुदा महिला, एक माँ को जलील किया गया।
मुझे गंदी गालियाँ दी गईं, मारने के लिए चप्पल उठाया गया।
मैंने सच नहीं छोड़ा, आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया।
और इसी वजह से मुझे बेइज्जती झेलनी पड़ी।
कल मैं मजबूरी में अपने रोते हुए माँ‑बाप और बहनों को छोड़ आई।
मुझे मेरा मायका छुड़वाया गया… मुझे अनाथ बना दिया गया।
आप सब कभी मेरे रास्ते मत चलना।
किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी‑बहन पैदा न हो।”
उनकी यह व्यथा केवल एक परिवार के संकट की कहानी नहीं है—यह सवाल भी है कि राजनीति के बीच रिश्तों का दर्द कितना गहरा हो सकता है।
सिंगापुर रवाना—भीगा हुआ मन, टूटे हुए रिश्ते
पटना से सिंगापुर जाने से पहले रोहिणी खुद को संभाल नहीं पाईं।
स्पष्ट कहा—
“मैंने जो दिया, उसके बदले अपमान मिला।”
लालू परिवार में इस फूट ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है कि चुनावी हार के बाद RJD का अंदरूनी संकट कितना बड़ा है।

