रिपोर्ट: तौफीक फारूकी
फर्रुखाबाद/हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला रविवार को फर्रुखाबाद पहुंचे। उन्होंने फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के जेएनवी रोड स्थित विद्यालय के सिल्वर जुबली समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। समारोह की शुरुआत भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई।
राज्यपाल ने विद्यालय की स्कूल पत्रिका का विमोचन किया और मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उनके साथ सांसद मुकेश राजपूत, कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी, अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य, कायमगंज विधायक, विद्यालय प्रबंधक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राज्यपाल के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। फर्रुखाबाद–फतेहगढ़ मुख्य मार्ग स्थित अंबेडकर तिराहा और जिला जेल–सेंट्रल जेल मार्ग के तिराहों पर बैरिकेडिंग लगाई गई। जेएनवी रोड आम जनता के लिए बंद कर दिया गया, और सुरक्षा के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल की गलियों में बने घरों के दरवाजों पर भी पर्दे लगाए गए।
राज्यपाल का संबोधन:
शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि वे कई वर्षों बाद फर्रुखाबाद आए हैं और उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यक्रमों और स्वर्गीय ब्रह्मदत्त अवस्थी व ब्रह्मदत्त द्विवेदी को स्मरण किया।
राज्यपाल ने विद्यालय के 25 वर्षों के गौरवपूर्ण सफर पर प्रबंध समिति और सत्य मोहन पाण्डेय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा पद्धति में अब भारतीयता को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कबीर, रहीम, सूरदास और तुलसीदास जैसे महापुरुषों का जिक्र करते हुए कहा कि पुराने पाठ्यक्रम में ऐसे अंश जोड़े गए थे जो भारतीय पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाते थे।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि देश की बागडोर आने वाले समय में युवाओं के हाथों में होगी, इसलिए विद्यालयों को जिम्मेदारी के साथ शिक्षा देने की आवश्यकता है। उन्होंने पब्लिक स्कूलों में सरकारी व्यवस्था के अनुसार सीटें देने पर भी जोर दिया।
पुराने दौर की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पहले डायटोन वाले फोन में सैकड़ों नंबर याद रहते थे, लेकिन आज मोबाइल में सब कुछ फीड नंबर पर निर्भर है। AI और तकनीक के बदलते दौर पर भी उन्होंने टिप्पणी की, और बताया कि अब वकील भी AI का उपयोग करके पूरी बहस की फाइल तैयार कर लेते हैं।
कार्यक्रम के अंत में राजपूत रेजीमेंट के सैनिकों द्वारा राष्ट्रीय गान प्रस्तुत किया गया। मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा और उदाहरण देते हुए बताया कि पहले जनधन खाते में ₹1 का केवल 15 पैसे पहुंचते थे, अब पूरा ₹1 पहुंचता है। इसके अलावा उन्होंने भारत की मोबाइल उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठा का जिक्र किया।

