महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल से गुजर रही है। राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर तनाव उस समय खुलकर सामने आ गया जब शिंदे शिवसेना के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा बुलाई गई कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर दिया।
BJP पर खरीद-फरोख्त के आरोप
शिंदे शिवसेना के नेताओं ने दावा किया है कि बीजेपी ने उनके विधायकों को तोड़ने और पार्टी को कमजोर करने की कोशिश की है। शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि
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“BJP की ओर से हमारे विधायकों को संपर्क कर उन्हें तोड़ने की कोशिश की गई।”
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“यह गठबंधन की आत्मा के खिलाफ है, इसलिए विरोध के तौर पर कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया गया।”
हालांकि BJP ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है और आरोपों को राजनीतिक ड्रामा बताया है।
कैबिनेट बैठक से दूरी… गठबंधन पर संकट?
शिंदे शिवसेना के बहिष्कार से यह संकेत मिल रहा है कि गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा होनी थी, लेकिन शिंदे गुट की अनुपस्थिति ने सियासी गर्मी बढ़ा दी।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक:
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यह तनाव सत्ता संतुलन को लेकर है।
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शिंदे गुट को लग रहा है कि BJP उन्हें कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है।
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आने वाले दिनों में दोनों दलों को रिश्ते सामान्य करने के लिए बातचीत करनी पड़ सकती है।
BJP का पलटवार
BJP नेताओं ने कहा कि:
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“शिंदे शिवसेना के आरोप बेबुनियाद हैं।”
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“सरकार स्थिर है, कोई खतरा नहीं है।”
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“विपक्ष बनावटी संकट खड़ा कर रहा है।”
क्या सरकार पर असर पड़ेगा?
फ़िलहाल सरकार को सीधा खतरा नहीं दिख रहा, लेकिन
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बढ़ते अविश्वास,
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लगातार आरोप-प्रत्यारोप,
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और कैबिनेट बहिष्कार
ये सभी संकेत दे रहे हैं कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

