संवाद – अज़मत अली
देवा मेला-2026 में हजारों जायरीन ने पेश की अकीदत, सूफी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक
बाराबंकी।सूफी संत हजरत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं देवा में गुरुवार शाम अकीदत, रूहानियत और आपसी सौहार्द का माहौल देखने को मिला। देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति के तत्वावधान में सूफी संत हजरत हाजी वारिस अली शाह और उनके वालिद सैयद कुर्बान अली शाह की मजार पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ चादरपोशी की गई।

जिलाधिकारी एवं देवा मेला एवं प्रदर्शनी समिति के अध्यक्ष ईशान प्रताप सिंह तथा अपर जिलाधिकारी और मेला समिति के सचिव निरंकार सिंह की अगुवाई में पीएसी बैंड की धुनों और गाजे-बाजे के साथ चादर जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए और अपनी अकीदत पेश की।
सैयद कुर्बान अली शाह की मज़ार पर पहले हुई चादरपोशी
चादर जुलूस सबसे पहले सैयद कुर्बान अली शाह की मजार पर पहुंचा। यहां पूरे अदब और एहतराम के साथ चादर अर्पित की गई। इसके बाद जुलूस हजरत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर पहुंचा, जहां चादरपोशी की गई।
इस अवसर पर अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए दुआ मांगी गई। बैंड की धुनों और जायरीन की मौजूदगी से पूरा क्षेत्र सूफियाना माहौल में रंगा नजर आया।
देवा की सूफी परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब की झलक
चादरपोशी के पारंपरिक आयोजन में बड़ी संख्या में जायरीन की भागीदारी ने देवा की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक समरसता को प्रदर्शित किया। आयोजन में अकीदत, आपसी सद्भाव और इंसानियत का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया।
देवा मेला-2026 के दौरान आयोजित यह कार्यक्रम सूफी संत हजरत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाओं और देवा की गंगा-जमुनी तहजीब की परंपरा को रेखांकित करता है।
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