मस्जिद नहर वाली में जुमा के खुत्बे के दौरान नमाज की अहमियत, तकब्बुर और शैतान के वसवसों पर किया विचारोत्तेजक संबोधन
आगरा। मस्जिद नहर वाली के खतीब मुहम्मद इक़बाल ने जुमा के खुत्बे के दौरान नमाज की अहमियत और सज्दे की अजमत पर रोशनी डालते हुए कहा कि अल्लाह तआला के हुक्म के सामने तकब्बुर और नाफरमानी करने के कारण इब्लीस पर कयामत तक लानत की गई। यह वाकया इंसान के लिए बड़ी इबरत और नसीहत का पैगाम है।
खतीब मुहमद इक़बाल ने कहा कि कुरआन करीम में हजरत आदम अलैहिस्सलाम को सज्दा करने के अल्लाह तआला के हुक्म का जिक्र मौजूद है। तमाम फरिश्तों ने अल्लाह के हुक्म की तामील की, लेकिन इब्लीस ने तकब्बुर करते हुए सज्दा करने से इनकार कर दिया। उसने खुद को बड़ा समझा और अल्लाह के हुक्म की नाफरमानी की। इसका अंजाम लानत और अज़ाब की शक्ल में सामने आया।
उन्होंने नमाज़ियों को मुखातिब करते हुए सवाल किया कि जब एक सज्दे से इनकार करने पर इब्लीस इस अंजाम तक पहुंचा, तो हमें खुद गौर करना चाहिए कि हम दिनभर में कितनी बार अल्लाह के हुक्म से गफलत बरतते हैं? पांच वक्त की फर्ज नमाजों में कुल 17 रकअत और 34 सज्दे होते हैं। अगर कोई व्यक्ति फर्ज नमाजें छोड़ता है, तो वह अल्लाह की इबादत के एक अहम फर्ज से महरूम रहता है।
उन्होंने हदीस-ए-नबवी का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि आदमी और शिर्क व कुफ्र के बीच फर्क नमाज छोड़ने का है। (सहीह मुस्लिम: 82)
उन्होंने आगे कहा कि क्या हमारे पास 24 घंटे में इतना वक्त भी नहीं है कि हम पांच वक्त की फर्ज नमाज अदा कर सकें? दुनिया के तमाम कामों के लिए हम वक्त निकालते हैं, लेकिन अपने खालिक के सामने सज्दा करने में गफलत बरतते हैं। यह बेहद फिक्र का मुकाम है।
खतीब मुहमम्द इक़बाल ने तकब्बुर के संबंध में एक और हदीस का हवाला देते हुए कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जिस व्यक्ति के दिल में राई के दाने के बराबर भी तकब्बुर होगा, वह जन्नत में दाखिल नहीं होगा। (सहीह मुस्लिम: 91)
उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी सोच और आमाल का जायजा लेना चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि दुनिया की मसरूफियत, खुदपसंदी और शैतान के वसवसे हमें नमाज से दूर कर रहे हैं? हमें शैतान का साथी बनने के बजाय अल्लाह तआला का फरमांबरदार बंदा बनने की कोशिश करनी चाहिए।
अपने खिताब के आखिर में उन्होंने तमाम मुसलमानों से अपील की कि नमाज की पाबंदी करें, तकब्बुर से बचें और अल्लाह तआला के सामने आजिजी के साथ सज्दा रेज हों।
उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला हम सभी को पांच वक्त की नमाज पाबंदी के साथ अदा करने, हर सज्दा करने और तकब्बुर व नाफरमानी से महफूज रहने की तौफीक अता फरमाए। आमीन या रब्बुल आलमीन।
