15 राज्यों के डॉक्टर रिसर्चर आंत के स्वास्थ्य पर बनाएंगे वर्ल्ड रिकॉर्ड
आगरा गोवा के बाद जयपुर में आयुष चिकित्सक करेंगे मंथन
आगरा। सिविक संस्था (काउंसिल फॉर इंटरनेशनल वैद्य इंटीग्रेशन एंड कॉरपोरेशन) द्वारा संचालित “आयुष लीजेंड सीरीज़” के तहत देशभर के पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ चिकित्सकों को वैश्विक पहचान देने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। आगरा और गोवा में इंटरनेशनल कांक्लेव के बाद इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव 3.0 का आयोजन जयपुर में 16 नवंबर को किया जाएगा।
इस पहल के सूत्रधार और संयोजक डॉ. एमएम कुरैशी जो वर्षों से देश-विदेश में प्राकृतिक चिकित्सा और आयुष प्रणाली के संवर्धन में सक्रिय हैं, ने बताया कि इस मंच के माध्यम से ऐसे चिकित्सकों को सामने लाया जा रहा है जो बिना रासायनिक दवाओं और बिना दुष्प्रभाव के गंभीर रोगों का इलाज कर रहे हैं।
डॉ. कुरैशी ने बताया कि आयुष शब्द अपने आपमें आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों का समावेश है। यानी भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराओं का एक समन्वित स्वरूप, जो आज भी असंख्य रोगियों को नई आशा देता है। यह सीरीज़ ऐसे मूक नायकों को सम्मान देने का प्रयास है, जो इन पद्धतियों के माध्यम से समाज की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि श्रृंखला की शुरुआत आगरा में ही हुई थी। द्वितीय कॉन्क्लेव गोवा में और इस बार जयपुर में 15 राज्यों के आयुर्वेदिक यूनानी होम्योपैथिक चिकित्सकों के अलावा डाइटिशियन, हेल्थ कोच, स्टूडेंट, रिसर्चर आंत के स्वास्थ्य पर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने जा रहे हैं।
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय 150 से ज्यादा आयुष चिकित्सक कॉन्क्लेव में सम्मानित किए जाएंगे जिसमें आगरा के चिकित्सक भी शामिल होंगे। साथ ही वे चिकित्सक भी इसमें शामिल होंगे जो भारत से बाहर भारतीय की चिकित्सा पद्धति का प्रचार प्रसार कर रहे हैं और लोगों को असाध्य रोगों में चिकित्सा प्रदान कर रहे हैं।
आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन में पारंपरिक चिकित्सा एवं आधुनिक तकनीक पर आधारित व्याख्यान सत्र,
शोध प्रस्तुति, वैज्ञानिक सत्र और सम्मान समारोह होगा।
तीन श्रेणियो में आयुष चिकित्सकों को सम्मान पत्र और विश्व रिकॉर्ड के सम्मान से नवाजा जाएगा।
आंत रोग का समाधान आयुष के पास
इंटरनेशनल आयुष कांक्लेव 3.0 में विश्व भर के आयुष चिकित्सक आंत की वजह से होने वाली बीमारियों पर चिंतन करेंगे। आयुर्वेदिक यूनानी होम्योपैथिक के अलावा अन्य पैथी भी इस बात को स्वीकार कर चुकी हैं कि शरीर में 80 परसेंट से ज्यादा बीमारियां आंत की वजह से होती हैं। इस बार के कांक्लेव में गट हेल्थ पर लीजेंड वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के साथ विश्व भर को यह संदेश दिया जाएगा के आंत की बीमारियों की समस्याओं का समाधान सिर्फ आयुष के पास है।
इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव एक ऐसा मंच है जहाँ पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) पर चर्चा की जाती है और उनके वैश्विक स्वास्थ्य में योगदान पर विचार-विमर्श होता है। ऐसे कई कॉन्क्लेव विभिन्न स्थानों पर आयोजित हुए हैं ।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्यः
जागरूकता बढ़ानाः आयुष चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा के सार्वजनिक स्वास्थ्य में शामिल करने और इसके लाभों के बारे में जागरूकता पैदा करना।
साक्ष्य-आधारित अनुसंधानः मन-शरीर स्वास्थ्य में साक्ष्य-आधारित आयुष हस्तक्षेपों पर ध्यान केंद्रित करना।
नवाचार और विचारों का आदान-प्रदानः स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुष चिकित्सकों को नए विचारों और शोधों पर चर्चा करने का अवसर देना।
निवेश को बढ़ावाः स्वास्थ्य-आधारित व्यवसायों और आयुष क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करना।

