अयोध्या, राजधानी लखनऊ में पत्रकार पर हुए हमले की गुत्थी अभी सुलझी भी नहीं थी कि अयोध्या से एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। हिन्दुस्तान अखबार के पत्रकार राममूर्ति यादव पर शुक्रवार देर शाम अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला कर दिया। इससे पत्रकार सुरक्षा को लेकर प्रदेशभर में गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
राजधानी में 22 नवंबर को हुआ था हमला, आज तक कोई गिरफ्तारी नहीं
लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में पत्रकार अमित पर 22 नवंबर की रात हमला हुआ था।
– पुलिस अब तक केवल विवेचना कर रही है
– न कोई गिरफ्तारी
– न ही हमला करने में उपयोग की गई गाड़ी बरामद
स्थानीय पत्रकार संगठनों का आरोप है कि पुलिस की सुस्त कार्यवाही ने अपराधियों के हौसले बढ़ाए हैं।
अयोध्या में लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से हमला
29 नवंबर की शाम अयोध्या में पत्रकार राममूर्ति यादव अपने वाहन के पास पहुंचे ही थे कि अचानक 4–5 अज्ञात हमलावरों ने उन पर लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया।
– सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें
– पैर में फ्रैक्चर
– जिला अस्पताल में भर्ती, उपचार जारी
स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। इस घटना ने पूरे मीडिया जगत में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
चौथे स्तंभ पर हमले—क्या पुलिस सक्रिय है?
पत्रकारों का सवाल है कि प्रदेश में पत्रकारों पर हो रहे लगातार हमलों को लेकर पुलिस कब ठोस, प्रभावी और त्वरित कार्यवाही करेगी?
क्या पुलिस की कार्यशैली अपराधियों को संरक्षण दे रही है?
क्या पत्रकार अब सुरक्षित नहीं?
मीडिया संगठनों ने मुख्यमंत्री और डीजीपी से घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।
घटना पर प्रशासन चुप—पत्रकार समुदाय में रोष
इन हमलों की बढ़ती श्रृंखला ने न केवल पत्रकारों बल्कि आम जनता में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों ने चेताया है कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रदेश-व्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

