जयपुर। अरावली पहाड़ियों को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील अरावली पर्वत श्रृंखला की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है और यदि यही निष्क्रियता जारी रही तो इसका परिणाम अपरिवर्तनीय पर्यावरणीय क्षति के रूप में सामने आएगा।
जयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि आज पूरे देश में अरावली को लेकर चर्चा हो रही है और लोग इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि आखिर कौन और क्यों उस पर्वत श्रृंखला को जानबूझकर खतरे में डाल रहा है, जो अनादिकाल से लाखों लोगों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करती रही है।
उन्होंने हालिया अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत की गई परिभाषा को स्वीकार किए जाने से अरावली क्षेत्र का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इस दायरे से बाहर हो जाएगा, जिससे वह पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। पायलट ने सवाल उठाया कि सरकार अपनी नाक के नीचे हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए आखिर क्या कर रही है?
कांग्रेस नेता ने कहा, “मुझे लगता है कि या तो सरकार बेबस है, या फिर उसके इरादों में ही खोट है। अब तक सरकार ने इस गंभीर मुद्दे पर परिभाषा को पुनः स्पष्ट करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख तक नहीं किया है।”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “यह दो इंजन वाली सरकार नहीं, बल्कि चार इंजन वाली सरकार है, और ये चारों इंजन मिलकर अरावली पर्वत श्रृंखला को नष्ट करने का रास्ता खोजने में लगे हुए हैं।”
सचिन पायलट के इस बयान के बाद अरावली संरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

