नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली हाइड्रोजन-ईंधन से चलने वाली ट्रेन का सफल ट्रायल रन पूरा कर लिया है। यह परीक्षण हरियाणा के जिंद–सोनीपत रूट पर किया गया, जिसने भारत को हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले देशों की वैश्विक सूची में शामिल कर दिया है।
ट्रायल के दौरान RDSO (रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन) ने ट्रेन की ऑस्सिलेशन (दोलन) और इमरजेंसी ब्रेक डिस्टेंस (EBD) जैसी अहम तकनीकी कसौटियों की गहन जांच की। इन परीक्षणों का उद्देश्य ट्रेन की सुरक्षा, संतुलन और परिचालन स्थिरता को परखना था, जिसमें ट्रेन सफल रही।
इस उपलब्धि के साथ भारत अब जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन के बाद दुनिया का पाँचवाँ देश बन गया है, जिसने हाइड्रोजन-आधारित रेल तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाया है। यह तकनीक शून्य कार्बन उत्सर्जन, कम शोर और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें उन रूट्स पर विशेष रूप से उपयोगी होंगी, जहाँ विद्युतीकरण संभव नहीं है। इससे न केवल डीज़ल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि भारत के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन को भी नई गति मिलेगी।
यह सफल ट्रायल भारतीय रेलवे की स्वदेशी तकनीक, नवाचार और भविष्य-तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेल नेटवर्क में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन की नई पहचान बन सकती हैं।
यह सिर्फ़ एक परीक्षण नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नया भारत सतत विकास की पटरी पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

