चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए कहा है कि पार्टी उनसे सलाह नहीं ले रही है, जबकि कांग्रेस के दौर में नेतृत्व नेताओं की राय को महत्व देता था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में दोबारा शामिल होने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
एक साक्षात्कार में अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस में रहते हुए जिस तरह उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, उसकी टीस आज भी उनके मन में है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस में वापसी का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन अगर सोनिया गांधी मुझसे मदद मांगेंगी तो मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी सहायता करूंगा, राजनीतिक रूप से नहीं।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिलना कांग्रेस हाईकमान से मिलने की तुलना में कहीं अधिक आसान है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी उनसे न तो सलाह लेती है और न ही निर्णय प्रक्रिया में शामिल करती है। अमरिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा में सभी बड़े फैसले दिल्ली में होते हैं और जमीनी नेताओं से परामर्श नहीं किया जाता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को पंजाब से विशेष लगाव है और वे राज्य के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। उन्होंने बताया कि वे प्रधानमंत्री को भाजपा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से अवगत करा चुके हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से पार्टी के कई राष्ट्रीय नेताओं को नहीं जानते।
दो बार मुख्यमंत्री रह चुके 83 वर्षीय नेता ने कहा, “मेरे पास 60 वर्षों का राजनीतिक अनुभव है, लेकिन मैं भाजपा पर अपना प्रभाव नहीं थोप सकता।”
उन्होंने पंजाब की जनता से स्थिरता के लिए भाजपा पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा और पंजाब के हित आपस में जुड़े हुए हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस की राज्य इकाई में आंतरिक कलह के चलते कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग पार्टी बनाई, जिसका 2022 में भाजपा में विलय हो गया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब नवजोत कौर सिद्धू के उस विवादित बयान के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल मची हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य में जो भी “500 करोड़ रुपये का सूटकेस” दे देता है, वही मुख्यमंत्री बन जाता है।

