नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि हर साल औसतन करीब दो लाख भारतीय विदेश में स्थायी रूप से बस रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में लगभग 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है, और 2021 के बाद इस संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ती गई। कोविड-19 महामारी के बाद विदेशों में बेहतर रोजगार, शिक्षा, व्यापार और जीवन स्तर के अवसरों के कारण बड़ी संख्या में लोग भारत छोड़कर अन्य देशों की नागरिकता अपना रहे हैं।
केंद्र सरकार ने बताया कि सबसे अधिक भारतीयों ने अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन की नागरिकता ली है। सरकार का कहना है कि नागरिकता छोड़ना व्यक्तिगत निर्णय होता है और इसे रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के प्रवासी समुदाय (डायस्पोरा) देश की अर्थव्यवस्था, निवेश और वैश्विक प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 के बाद नागरिकता छोड़ने की प्रवृत्ति तेज हुई है, जिसे महामारी के बाद खुले वैश्विक अवसरों और अंतरराष्ट्रीय आव्रजन नीतियों में ढील से जोड़ा जा रहा है।

