मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच Israel की सेना पर गंभीर संकट के संकेत मिल रहे हैं। Israel Defense Forces (आईडीएफ) के प्रमुख Eyal Zamir ने चेतावनी दी है कि यदि सैनिकों की भारी कमी का समाधान नहीं किया गया, तो सेना अंदरूनी तौर पर “ढह” सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा मामलों की कैबिनेट बैठक में सेना प्रमुख ने 10 बड़े खतरों (रेड फ्लैग) को सामने रखा। इनमें सबसे अहम है—मैनपावर की भारी कमी, लगातार युद्ध में लगे सैनिकों पर बढ़ता दबाव और थकान।
तीन मोर्चों पर जंग का दबाव
इस समय इस्राइल एक साथ कई क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों में उलझा हुआ है—
- Gaza Strip में Hamas के खिलाफ ऑपरेशन
- Lebanon में Hezbollah के साथ तनाव
- Syria और West Bank में सुरक्षा तैनाती
इन सभी मोर्चों पर लगातार सैनिकों की जरूरत बनी हुई है, जिससे सेना पर दबाव और बढ़ गया है।
सेना के सामने 10 बड़े खतरे
सेना प्रमुख ने जिन प्रमुख खतरों का जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:
- सैनिकों की भारी कमी
- लगातार मिशनों से बढ़ता बोझ और थकान
- मानसिक स्वास्थ्य संकट
- ट्रेनिंग की गुणवत्ता में गिरावट
- अनुभवी कमांडरों की कमी
- हथियारों की सप्लाई पर जोखिम
- भर्ती प्रक्रिया में असमानता
- अर्थव्यवस्था पर पड़ता असर
उन्होंने साफ कहा कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
हरेदी यहूदी भर्ती बना बड़ा मुद्दा
इस संकट की एक बड़ी वजह Haredi Jews (अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स यहूदी) समुदाय का सेना में सीमित भागीदारी है। परंपरागत रूप से इस समुदाय के पुरुष धार्मिक ग्रंथ Torah के अध्ययन में लगे रहते हैं और उन्हें सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है।
प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि हरेदी भर्ती से जुड़ा कानून फिलहाल युद्ध के कारण टाल दिया गया है, क्योंकि इससे देश की एकता प्रभावित हो सकती है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है। विपक्षी नेता Yair Lapid ने मांग की है कि तुरंत अनिवार्य सैन्य सेवा कानून लागू किया जाए और आपात बैठक बुलाई जाए।
लगातार युद्ध, सीमित संसाधन और भर्ती से जुड़े विवादों के चलते इस्राइल की सेना एक कठिन दौर से गुजर रही है। अगर मैनपावर संकट का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो इसका असर सिर्फ युद्धक्षेत्र ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

