संवाद। तौफीक फारूकी
कन्नौज/गुरसहायगंज। पवित्र रमज़ान माह के छठे रोज़े पर मुरादगंज मवेशी बाजार में टीम जुनैद कन्नौज और Oasis ग्रुप की ओर से भव्य रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोग एक साथ शामिल हुए और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की।
इफ्तार कार्यक्रम में रोजेदारों ने खजूर और पानी से रोज़ा खोला, सामूहिक रूप से इबादत की और देश में अमन, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ मांगी। माहौल पूरी तरह भाईचारे और सौहार्द से सराबोर रहा, जहां हर तबके और हर उम्र के लोग मौजूद रहे।
रोज़ा सिर्फ भूखा रहना नहीं, खुद को बेहतर बनाना है: ताहिर हुसैन सिद्दीकी
पूर्व विधायक एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता ताहिर हुसैन सिद्दीकी ने कहा कि रोज़ा अल्लाह की मुकम्मल इबादत है। इसका मतलब सिर्फ भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि रमज़ान का असल मकसद खुद को बेहतर इंसान बनाना, समाज की भलाई के लिए काम करना और जरूरतमंदों व बेसहारा लोगों का सहारा बनना है।
उन्होंने कहा कि सच्ची इबादत और इंसानियत के साथ जीवन जीने से ही एक खूबसूरत समाज का निर्माण संभव है। नौजवानों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों ने भी रोज़ा रखकर मुल्क की सलामती की दुआ मांगी।
रमज़ान देता है बराबरी और इंसानियत का पैग़ाम
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाजी तहसीन सिद्दीकी ने कहा कि रमज़ान हमें भाईचारे और एक-दूसरे की मदद करने की सीख देता है। अमीर-गरीब सब एक साथ बैठकर इफ्तार करते हैं, जिससे बराबरी और इंसानियत का एहसास मजबूत होता है।
उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी खजूर से रोज़ा खोलना फायदेमंद है, क्योंकि यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। दिनभर के उपवास के बाद हल्का और पौष्टिक भोजन सेहत के लिए लाभकारी होता है।
एक नेकी का सवाब सत्तर गुना
सपा नेता जुनैद सिद्दीकी ने कहा कि रमज़ान रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना है। इस महीने में एक नेकी के बदले सत्तर नेकियों का सवाब मिलता है। यह महीना इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेकी और भलाई की राह पर चलने का संदेश देता है।
इफ्तार कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आयोजन को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक चर्चा रही और लोगों ने इसे भाईचारे की मजबूत मिसाल बताया।

