नई दिल्ली, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड (एएचईएल) द्वारा डॉ. हरित कुमार चतुर्वेदी को अपोलो ऑन्कोलॉजी नेटवर्क का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और क्लिनिकल हेड नियुक्त किया गया है।
डॉ. हरित कुमार चतुर्वेदी के पास सर्जिकल ऑन्कोलॉजी का लगभग 40 सालों का अनुभव है। वे अपने विस्तृत अनुभव और नेतृत्व के साथ एक बार फिर अपोलो में वापस आ गए हैं। अपोलो में उनकी मौजूदगी से कैंसर केयर में सुधार होगा तथा पूरे भारत में मरीजों को विशेषज्ञ, अंग-विशिष्ट और टेक्नोलॉजी पर आधारित इलाज मिल सकेगा, जिसके वो हकदार हैं।
डॉ. चतुर्वेदी ने एम.बी.बी.एस., जनरल सर्जरी में एम.एस. और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में एम.सी.एच. की डिग्री प्राप्त की है। पिछले 38 सालों में उन्होंने सिर-गर्दन, स्तन, छाती, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और महिलाओं से जुड़े कई तरह के जटिल कैंसर का इलाज किया है। उन्हें रोबोटिक सर्जरी, मिनिमली इनवेज़िव सर्जरी और रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन में खास अनुभव है। उन्होंने उत्तर भारत में एक मजबूत कैंसर इलाज सिस्टम बनाया, जहाँ अलग-अलग अंगों के कैंसर के लिए अलग टीमें हैं, कई डॉक्टर मिलकर मरीज का इलाज तय करते हैं, और देशभर में रिसर्च के लिए मिलकर काम किया जाता है। 2013 में हुए प्रथम भारतीय कैंसर कांग्रेस 2013 के आयोजन में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई, जो एक बड़ा और महत्वपूर्ण कार्यक्रम था और जिसने आगे के कार्यक्रमों के लिए मानक स्थापित किया। वे कई बड़े संगठनों के प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं, जिसमें इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी, इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और ऑन्कोलॉजी फोरम शामिल हैं। इसलिए इस क्षेत्र में उनकी नेतृत्व क्षमता बेजोड़ है।
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन सुश्री प्रीथा रेड्डी ने बताया कि, “अपोलो हॉस्पिटल्स में हमारा मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य देश के लिए बहुत जरूरी है और इसकी जिम्मेदारी हम सबकी है। भारत में कैंसर का इलाज ऐसा होना चाहिए जो हर जगह आसानी से मिल सके, सटीक हो और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँच सके। डॉ. चतुर्वेदी दुनिया के सबसे अच्छे कैंसर सर्जनों में से एक हैं, जो पूरी दुनिया में मशहूर हैं। उन्हें सही लोगों की टीम बनाना, आधुनिक प्रक्रियाओं को लागू करना और इलाज़ के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना अच्छी तरह आता है। अपोलो के कैंसर विभाग को अभी आगे बढ़ने के लिए ठीक इसी तरह के लीडर की जरूरत है। अपोलो में उनका वापस आना ऐसा है जैसे वे अपने ही घर लौट आए हों। हमें भरोसा है कि उनके साथ हम ज्यादा लोगों तक अच्छा इलाज पहुँचा पाएंगे और अपने लक्ष्य के और करीब आसानी से पहुँच जाएंगे।”
वे लंबे समय से कैंसर से बचाव और तंबाकू के खिलाफ काम करते रहे हैं। उन्होंने पूरे देश में कैंसर के नियम बनाने और लोगों में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई है।
डॉ. चतुर्वेदी के लिए यह वापसी घर लौटने जैसी है। वे पहले भी 2000 से 2004 तक इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में कैंसर सर्जरी के सीनियर डॉक्टर के रूप में काम कर चुके हैं।
अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड के अपोलो ऑन्कोलॉजी नेटवर्क के सीईओ और क्लिनिकल हेड डॉ. हरित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि, “मुझे अपोलो में वापस आकर बहुत खुशी और गर्व है। अपोलो ने भारत में कैंसर इलाज का बहुत अच्छा स्तर बनाया है और यहाँ अच्छी सुविधा, नई टेक्नोलॉजी और सही इलाज देने की सोच है, जिससे मरीजों को सच में फायदा होता है। इस मजबूत आधार और प्रोटोकॉल को सब-स्पेशियलाइज़ेशन, रोबोटिक और मिनिमली इनवेज़िव सर्जरी, और हर हॉस्पिटल में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की मदद से बेहतर बनाना मेरा मकसद है। मैं चाहता हूँ कि अपोलो के माध्यम से विश्वस्तर की कैंसर केयर हर उस भारतीय तक पहुँचे जिसे इसकी जरूरत है, चाहे वह कहीं भी रहता हो।”
उनके साथ 25 से ज्यादा विशेषज्ञ कैंसर डॉक्टरों की टीम भी जुड़ी है, जिससे अपोलो की इलाज करने की क्षमता और मजबूत हो गई है। अब अपोलो में कैंसर का पूरा और बेहतर इलाज किया जा सकेगा, जहाँ कई डॉक्टर मिलकर सही और जल्दी इलाज करते हैं।
अपोलो का लक्ष्य है कि भारत में कैंसर का इलाज और बेहतर बनाया जाए जैसे जल्दी पता लगाना, खास इलाज देना और हर किसी तक इलाज पहुँचाना। डॉ. चतुर्वेदी इस पूरे कैंसर नेटवर्क को संभालेंगे, जो 30 साल से लोगों को उम्मीद दे रहा है। इस नेटवर्क में 400 से ज्यादा कैंसर डॉक्टर हैं और यह पूरे भारत में फैला हुआ है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कैंसर से लड़कर जीत सकें।
आज कैंसर के इलाज के लिए लगभग 147 देशों से लोग भारत के अपोलो हॉस्पिटल्स में आते हैं। कैंसर के बेहतर इलाज के लिए दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का पहला पेंसिल बीम प्रोटॉन थेरेपी सेंटर भी अपोलो के पास है। इसलिए अपोलो में कैंसर से लड़ने के लिए सभी जरूरी सुविधाएँ और टेक्नोलॉजी मौजूद हैं।
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