विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में बांदा के मिल्खा सिंह के रूप में मशहूर उम दराज मोतीलाल नें एशिया मास्टर एथलीट प्रतियोगिता हिस्सा लेकर कास्य पदक हासिल कर जिले के गौरव को बुलंदी से चमका दिया। साबित कर दिया की आत्मबल बुलंद हो तो उम्र भी कामयाबी में बाधा नहीं बन सकती।
दिल के मरीज 76 वर्षीय मोती लाल शहर के मोहल्ला सरांय के निवासी हैं जिन्हें दौड़ गौरव का रुस्तम माना जाता हैं। इन्होंने जवाहरलाल नेहरू एथलीट चैंपियनशिप तमिलनाडु चेन्नई में हुई 23 वीं एशिया मास्टर एथलीट प्रतियोगिता में पांच हजार मीटर रेस में एक बार फिर वामदेव की इस नगरी बांदा का नाम प्रकाशवान कर रोशन कर दिया। इस प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त करने पर उन्हें कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
धावक मोतीलाल नें दौड़ मिल्खा दौड़ को चरितार्थ करने में अपनी उम्र को शिकस्त दें कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं।
धावक मोतीलाल चौरसिया को बचपन से ही खेल के प्रति आकर्षण था। बैडमिंटन, वॉलीबॉल आदि में सफलता न मिलने पर इन्होंने वर्ष 1963-64 से दौड़ना शुरू किया। उस समय वह डीएवी इंटर कालेज में छठवीं के छात्र थे। वर्ष 1971 से 1978 तक जेएन डिग्री कालेज में स्पोर्ट्स चैंपियन रहे।
वर्ष 1979 से वह तीन साल तक बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी स्तर पर चैंपियन रहे। 1971-72 में इलाहाबाद जोन की प्रतियोगिता में लगातार तार तीन मेडल प्राप्त किए। वर्ष 1979 में बीमारी के चलते उन्होंने दौड़ना बंद कर दिया। 36 साल के लंबे अंतराल के बाद उनका जज्बा फिर उफान मारने लगा। उन्होंने हैदराबाद, बेंगलुरू, 2018 में चंडीगढ़ में धावकी का लोहा मनवाया। एक किलो मीटर से लेकर पांच किमी दौड़ में कांस्य पदक हासिल किए। 2023 को अलीगढ़ में हुई राज्य स्तरीय पांच किमी दौड़ में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
वर्ष 2024 को आंध्र प्रदेश की गुंटूर में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्स लिया और तीसरा स्थान पाये।
इसके अलावा सात नेशनल व 11 राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर मेडल जीते। हाल ही में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू एथलीट चैंपियनशिप तमिलनाडु चेन्नई में हुई 23 वीं एशिया मास्टर एथलीट प्रतियोगिता में पांच हजार मीटर रेस में तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक प्राप्त वाम देव की नगरी में “बम बम लहरी” कर दिया है।

