लखनऊ। अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के लोग किसी को पूजना चाहते हैं तो यह उनका व्यक्तिगत विषय है, लेकिन कानून और संविधान से ऊपर कोई नहीं है—यहां तक कि वे स्वयं भी नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आस्था और परंपरा का देश है, लेकिन व्यवस्था और कानून का पालन सर्वोपरि है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार कानून के शासन (Rule of Law) के सिद्धांत पर कार्य कर रही है और किसी भी व्यक्ति या संगठन को विशेष छूट नहीं दी जा सकती।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि धार्मिक पद और उपाधियां परंपरा, मान्यता और शास्त्रीय प्रक्रिया से निर्धारित होती हैं, न कि राजनीतिक समर्थन से। उन्होंने संकेत दिया कि धार्मिक विषयों को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।
सीएम के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप बता रहा है, वहीं भाजपा इसे कानून और व्यवस्था की मजबूती से जोड़कर देख रही है।
राजनीतिक गलियारों में इस बयान को आने वाले समय में बढ़ती सियासी बयानबाजी का संकेत माना जा रहा है।

