लखनऊ, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, लखनऊ से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), नई दिल्ली को पत्र भेजकर प्रदेश में प्रतिबंधित चीनी मांझे से हो रही निर्दोष मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नायलॉन व धातु मिश्रित अत्यंत तेज मांझे का खुलेआम अवैध व्यापार प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत नागरिकों के जीवन के मूल अधिकार का घोर उल्लंघन है।
अजय राय ने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझा बाजारों में उपलब्ध है और लगातार निर्दोष नागरिक इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। यह केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनहीनता और राज्य की संरचनात्मक विफलता का भी गंभीर उदाहरण है। पीड़ित परिवारों को न तो समय पर मुआवजा मिल रहा है और न ही दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो रही है।
उन्होंने एनएचआरसी से सात सूत्री मांगें रखते हुए सभी घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर विस्तृत जांच कराने, राज्य सरकार से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब करने, मृतकों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा देने, प्रत्येक परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी अथवा पुनर्वास उपलब्ध कराने, मांझा माफिया व लापरवाह अधिकारियों पर सख्त आपराधिक व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु प्रभावी नीति व निगरानी तंत्र लागू करने तथा जौनपुर, शाहजहांपुर व वाराणसी से संबंधित समाचार क्लिपिंग्स पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।
अजय राय ने कहा कि यदि समय रहते ठोस और कठोर कदम नहीं उठाए गए तो निर्दोष नागरिक इसी तरह मौत का शिकार होते रहेंगे और यह मानवाधिकार संरक्षण तंत्र की विफलता के रूप में दर्ज होगा।
11 दिसंबर 2025 को जौनपुर के शास्त्री पुल पर बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहे शिक्षक संदीप त्रिपाठी (39 वर्ष) की चीनी मांझे से गर्दन कटने के कारण मृत्यु हो गई। शाहजहांपुर में मोटरसाइकिल से जा रहे सिपाही शाहरुख हसन (27 वर्ष) की भी इसी तरह जान चली गई। वहीं 31 दिसंबर को वाराणसी में विवेक की गंभीर चोटों से मृत्यु हो गई, जबकि उनकी मां श्यामलता घायल हैं। इन घटनाओं ने प्रशासनिक सतर्कता और सरकारी दावों की पोल खोल दी है।
जौनपुर पुलिस द्वारा छापेमारी कर 70 किलो प्रतिबंधित चीनी मांझा जब्त किया गया है और चार विक्रेताओं को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि कई कारोबारी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि अवैध कारोबार की जड़ पर प्रहार किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पूरी तरह रोकी जाए।

