Uttar Pradesh की बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में इस शैक्षिक सत्र से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रदेश सरकार अब बच्चों को मोबाइल फोन की स्क्रीन से दूर कर किताबों, अखबारों और पुस्तकालयों की दुनिया से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।
माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए स्कूलों में पठन संस्कृति को मजबूत बनाने, दैनिक समाचार पत्र पढ़ने की आदत विकसित करने और पुस्तकालय गतिविधियों को अनिवार्य रूप से बढ़ावा देने को कहा है।
अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक शिक्षा Parth Sarathi Sen Sharma ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अभियान नहीं बल्कि प्रदेश के भविष्य को संवारने का साझा संकल्प है। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
दरअसल, पिछले वर्ष दिसंबर में भी सभी विद्यालयों में अखबार पढ़ने को लेकर निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कई स्कूलों में इन निर्देशों का पालन गंभीरता से नहीं हुआ। इसी को देखते हुए बुधवार को एक बार फिर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में “रीडिंग आवर्स” और पठन गतिविधियों को शैक्षिक कैलेंडर का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। विद्यालयों को समय-सारिणी के अनुसार पठन कार्यक्रम चलाने और पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को पुनरावृत्ति और स्व-अध्ययन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
विद्यालयों में दैनिक समाचार पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे और प्रार्थना सभा में प्रमुख खबरों व संपादकीय लेखों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा कौशल, शब्द भंडार, तार्किक सोच, सामाजिक जागरूकता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की क्षमता विकसित करना है।
इसके साथ ही स्कूलों और पुस्तकालयों में स्थानीय लेखकों, साहित्यकारों और वरिष्ठ पाठकों के साथ “लेखक संवाद कार्यक्रम” आयोजित किए जाएंगे। Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya और विद्यालयी पुस्तकालयों को भी इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जाएगा। विभाग के अनुसार कस्तूरबा गांधी विद्यालयों की लाइब्रेरी में पुस्तकें उपलब्ध करा दी गई हैं।
सरकार “बुके नहीं, बुक अभियान” को भी बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत पुरस्कार समारोहों में स्मृति चिह्न की जगह किताबें भेंट की जाएंगी।
हर सप्ताह होगा “सब कुछ छोड़कर पढ़ें” पीरियड
सभी स्कूलों में रीडिंग क्लब बनाए जाएंगे और सप्ताह में एक पीरियड “सब कुछ छोड़कर पढ़ें” गतिविधि के लिए निर्धारित होगा। इस दौरान शिक्षक और विद्यार्थी अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ेंगे।
हर महीने “पठन प्रश्नोत्तरी उत्सव” और लेखन प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी। प्राथमिक स्तर पर 20 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को “सुपर-20 रीडर्स” और उच्च प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर 30 से अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को “सुपर-30 रीडर्स” के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
सत्र के अंत में सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को “चैंपियन रीडर ऑफ द ईयर” घोषित किया जाएगा। इन गतिविधियों और पुरस्कारों का खर्च विद्यालयों की कंपोजिट ग्रांट से वहन किया जाएगा।

