ख़ानक़ाह क़ादरिया नियाज़िया, आगरा में जश्न-ए-पैदाइश श्रद्धा व अकीदत के साथ मनाया गया
आगरा | आस्ताना हज़रत मैकश ख़ानक़ाह ए क़ादरिया नियाज़िया, मेवा कटरा सेब का बाज़ार, आगरा में हज़रत इमाम अली (अलैहिस्सलाम) के जन्मदिवस के अवसर पर भव्य धार्मिक व साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों, उलमा, सूफी संतों और शायरों ने शिरकत की।
इस अवसर पर हज़रत मोहम्मद पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) के फ़रमान “हज़रत अली का ज़िक्र करना इबादत है” को याद करते हुए वक्ताओं ने हज़रत अली के जीवन, शिक्षाओं और मानवता के लिए उनके योगदान पर विस्तार से रोशनी डाली।

इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रज्जब माह की 13 तारीख़ को, सन 601 ईस्वी (17 मार्च 601) में मक्का में जन्मे हज़रत अली इब्ने अबी तालिब को इस्लाम का सबसे बहादुर योद्धा, महान विद्वान, कुशल शासक और उच्च मानवीय मूल्यों का प्रतीक बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि हज़रत अली का जीवन न्याय, अमन, भाईचारे और इंसानियत का जीवंत उदाहरण है।
पैग़म्बर-ए-इस्लाम (स.अ.व.) का कथन “मैं ज्ञान का शहर हूँ और अली उसका दरवाज़ा हैं” इस बात का प्रमाण है कि हज़रत अली ज्ञान, विवेक और सत्य के सर्वोच्च प्रतीक थे। वे मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम और चौथे ख़लीफ़ा थे, साथ ही सूफी संतों के सर्वप्रथम गुरु भी माने जाते हैं।
मीलाद, दुआ और मनक़बती मुशायरा
शाम 6 बजे मीलाद-ए-हज़रत इमाम अली का आयोजन हुआ, जिसे सय्यद फैज़ अली शाह ने पढ़ा। इसके बाद सज्जादा नशीन हज़रत सय्यद अजमल अली शाह ने फातेहा और दुआ कराई तथा हज़रत अली की शिक्षाओं पर अमल करने, एकता और अमन का पैग़ाम दिया।
रात 8 बजे से हज़रत इमाम अली को समर्पित भव्य मनक़बती मुशायरा आयोजित हुआ, जिसकी सदारत व संचालन शाहिद नदीम ने किया। मुशायरे में इक़बाल ख़लिश, अमीर अकबराबादी, चाँद अकबराबादी, माहिर अकबराबादी, दिलकश जालौनवी, दाऊद इक़बाल, अनवर अमान, सय्यद रिज़वान अहमद क़रार अकबराबादी, हसन इक़बाल रामपुरी, सुहैल लख़नवी सहित अनेक शायरों ने हज़रत अली की शान में मनक़बतें पेश कर समां बांध दिया।
लंगर और विशेष उपस्थिति
कार्यक्रम के समापन पर मुल्क में अमन, तरक्की और खुशहाली की दुआ के साथ हज़रत अली का तबर्रुक (लंगर) अकीदतमंदों में वितरित किया गया।
इस मौके पर विशेष रूप से सय्यद शमीम अहमद शाह, सय्यद शब्बर अली शाह, सय्यद शफख़त अहमद, सय्यद महमूद उज़्ज़मा, डॉ. सय्यद फ़ाईज़ अली शाह, सय्यद नक़ी अली शाह, हाजी इम्तियाज़, हाजी अल्ताफ़ हुसैन अख़्तर उवैसी, चाँद अब्बासी, अज़हर उमरी, पीरज़ादा आरिफ़ तैमूरी, वकील नियाज़ी, शाहरूख़ नियाज़ी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन हज़रत इमाम अली की शिक्षाओं—न्याय, प्रेम, सहिष्णुता और इंसानियत—को जीवन में अपनाने के संकल्प के साथ हुआ।

