सेंट्रल हज कमेटी को भेजा गया सुझाव, राज्यों की खानपान संस्कृति के अनुसार कैटरिंग व्यवस्था लागू करने की मांग
लखनऊ। हज यात्रा पर जाने वाले उत्तर प्रदेश के यात्रियों को इस बार उनकी खानपान की पसंद के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराने की पहल की गई है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सेंट्रल हज कमेटी को प्रस्ताव भेजकर राज्यों की खाद्य संस्कृति के अनुसार कैटरिंग व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि वर्तमान में हज यात्रियों को एक जैसी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जबकि देश के विभिन्न राज्यों के लोगों की भोजन संबंधी आदतें अलग-अलग हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के हज यात्रियों के लिए रोटी, दाल, चावल, सब्जी और नॉनवेज के साथ रोटी-चावल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उपनिदेशक एवं उत्तर प्रदेश हज समिति के कार्यपालक अधिकारी मो. तारिक ने बताया कि यह प्रस्ताव हज यात्रा से लौटे यात्रियों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। हालांकि, इस पर सेंट्रल हज कमेटी की ओर से अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के लोगों की भोजन संबंधी पसंद अन्य राज्यों से अलग है। उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल के लोग चावल और मछली को प्राथमिकता देते हैं, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों के यात्री सांभर, वड़ा और अन्य स्थानीय व्यंजन पसंद करते हैं। एक समान भोजन व्यवस्था के कारण कई यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत सेंट्रल हज कमेटी अधिकृत कैटरर्स की सूची उपलब्ध कराती है, जिनसे संपर्क कर यात्री भोजन प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, भोजन के विकल्प सीमित होने के कारण यात्रियों की पसंद के अनुरूप सुविधा नहीं मिल पाती। इसी को ध्यान में रखते हुए कैटरिंग व्यवस्था में बदलाव का सुझाव भेजा गया है।

