ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड (यूथ) पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद आदिल ने टाइम्स ऑफ ताज से साझा किए हज यात्रा के रूहानी अनुभव
आगरा। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड (यूथ) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मुहम्मद आदिल हज-ए-बैतुल्लाह की मुकद्दस यात्रा पूरी कर आगरा लौट आए हैं। हज से वापसी के बाद उन्होंने टाइम्स ऑफ ताज से विशेष बातचीत में अपने रूहानी सफर के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि हज केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि इंसान को सब्र, त्याग, अनुशासन, भाईचारे और अल्लाह की बंदगी का वास्तविक अर्थ सिखाने वाला जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव है।
मुहम्मद आदिल ने कहा कि जब पहली बार उनकी नजर खान-ए-काबा पर पड़ी तो दिल की कैफियत को शब्दों में बयान करना मुश्किल था। उस पल आंखें नम थीं और जुबान पर सिर्फ दुआएं थीं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कोने-कोने से आए लाखों मुसलमानों को एक ही मकसद और एक ही इबादत में मशगूल देखना अल्लाह की कुदरत और इस्लाम की एकता का बेहतरीन नमूना है।
उन्होंने बताया कि तवाफ, सई, मिना में कयाम, अराफात में वुकूफ और मुज़दलिफा में रात गुजारने का हर मरहला इंसान के दिल और रूह पर गहरा असर छोड़ता है। खासकर मैदान-ए-अराफात में बिताए गए लम्हों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहां इंसान खुद को अपने रब के सबसे करीब महसूस करता है। लाखों लोग एक साथ अपने गुनाहों की माफी और दुनिया में अमन-चैन की दुआ करते नजर आते हैं।
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड (यूथ) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मुहम्मद आदिल ने कहा कि आज के दौर में हज का सबसे बड़ा संदेश इंसानियत, आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द है। उन्होंने कहा कि हमें हज से लौटकर समाज में प्रेम, शांति, सेवा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने सऊदी अरब सरकार और वहां की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि लाखों हाजियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा के लिए बेहतरीन इंतजाम किए गए थे। आधुनिक तकनीक और सुनियोजित प्रबंधन के कारण पूरे हज ऑपरेशन को सुचारु रूप से संचालित किया गया।
मुहम्मद आदिल ने बताया कि उन्होंने हज के दौरान देश की तरक्की, उत्तर प्रदेश की खुशहाली, आगरा की अमन-शांति और पूरी इंसानियत की भलाई के लिए विशेष दुआएं कीं। उन्होंने कहा कि हज से लौटने के बाद इंसान के अंदर एक सकारात्मक बदलाव आता है और वह समाज के लिए अधिक जिम्मेदारी महसूस करता है।
आगरा पहुंचने पर परिजनों, मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हज का अनुभव उनकी जिंदगी की सबसे अनमोल पूंजी है।
अंत में उन्होंने कहा, “हज इंसान को अल्लाह से जोड़ने के साथ-साथ इंसानियत की सेवा का संदेश भी देता है। मेरी दुआ है कि अल्लाह तआला हर साहिबे-इस्तिताअत मुसलमान को हज की सआदत नसीब फरमाए और पूरी दुनिया में अमन व भाईचारा कायम रहे।”

