लेखक – अज़हर उमरी
(वरिष्ठ पत्रकार सामाजिक चिंतक)
भारत रत्न, संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती (14 अप्रैल 2026) के पावन अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन और भावभीनी श्रद्धांजलि।
डॉ. अंबेडकर केवल एक महान विधिवेत्ता ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के सबसे बड़े योद्धा थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन वंचितों, शोषितों और दलित समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया। विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेकर उन्होंने शिक्षा के बल पर दुनिया को यह दिखाया कि दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव भी संभव हो सकता है।
🔥 बाबा साहेब से जुड़े रोचक व प्रेरक तथ्य (Rock Facts)
- 📚 डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने विदेश से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (PhD) की उपाधि प्राप्त की।
- 🎓 उन्होंने Columbia University और London School of Economics जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थानों से उच्च शिक्षा हासिल की।
- ⚖️ वे भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष रहे और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को एक मजबूत संविधान दिया।
- 🕰️ कहा जाता है कि वे रोज़ाना 18–20 घंटे तक अध्ययन करते थे।
- 📖 उनके निजी पुस्तकालय में 50,000 से अधिक किताबें थीं, जो उस समय भारत के सबसे बड़े निजी संग्रहों में से एक था।
- 🏛️ उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्थापना के पीछे आर्थिक नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- ✍️ उन्होंने “Annihilation of Caste” जैसी क्रांतिकारी पुस्तक लिखकर समाज में नई सोच जगाई।
- 🚰 महाड़ सत्याग्रह के माध्यम से उन्होंने पानी जैसे बुनियादी अधिकार के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया।
🌟 प्रेरणा का अमर संदेश
डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, संघर्ष और आत्मसम्मान से ही समाज में बदलाव लाया जा सकता है। उनका दिया हुआ मूल मंत्र—
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”
आज भी हर युवा के लिए मार्गदर्शक है।
आज उनकी 135वीं जयंती पर आइए, हम केवल उन्हें याद ही न करें, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें और एक ऐसे भारत का निर्माण करें जहां हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिले।
🙏 शत-शत नमन, बाबा साहेब! 🙏

