शिक्षार्थी के साथ विद्यार्थी भी बने युवा पीढ़ी – पीठाधीश्वर का आह्वान
आगरा।हिन्दू होना जितना गौरव की बात है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है। यदि आज का हिन्दू राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तो भारत एक बार फिर विभाजन की दिशा में बढ़ सकता है। व्यक्तिगत भोग और स्वार्थ की लिप्सा में डूबा समाज न केवल राष्ट्र को कमजोर करता है, बल्कि व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी दुख और असंतोष को जन्म देता है।
यह विचार पीठाधीश्वर सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज ने व्यक्त किए। वे सैमरा में आयोजित होने वाले विराट हिन्दू सम्मेलन में भाग लेने के लिए आगरा पहुंचे थे। कमला नगर स्थित सौरभ गुप्ता के निवास पर उनके आगमन पर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए महाराज जी ने वर्तमान सामाजिक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर खुलकर अपनी बात रखी।

उन्होंने कहा कि यह संघ का शताब्दी वर्ष है और विराट हिन्दू सम्मेलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि आम हिन्दुओं और राष्ट्रवादियों का कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य है—सामूहिक रूप से जाग्रत होकर स्वयं को भी जागरूक करना और समाज को भी चेतना से भरना। यदि भारत हिन्दुओं द्वारा पुष्पित, पल्लवित और पोषित होगा तो पूरे विश्व में आनंद और शांति की सुगंध फैलेगी।
बांग्लादेश की स्थिति चेतावनी है
बांग्लादेश की स्थिति पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में महाराज जी ने कहा कि आज वहां हिन्दुओं पर हो रहा अत्याचार कोई नया नहीं है। यही इतिहास कभी कंधार, लाहौर और सिंध में भी दोहराया गया था। बांग्लादेश भी उसी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की चिंता के साथ-साथ हमें अपने देश की भी चिंता करनी चाहिए, क्योंकि जो वहां दिखाई दे रहा है, वह संकेत हमें अपने भीतर भी देखने की आवश्यकता है।
राष्ट्र कथा की वर्तमान समय में अत्यधिक आवश्यकता
राष्ट्र कथा के महत्व पर बोलते हुए महाराज जी ने कहा कि जैसे घर में सुरक्षित रहने के लिए मजबूत छत आवश्यक है, वैसे ही देश में सुरक्षित जीवन के लिए राष्ट्र का सुरक्षित होना जरूरी है। इतिहास से सीख लेकर यह सुनिश्चित करना होगा कि हिन्दुओं को फिर कभी विस्थापन और पीड़ा का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण भारत की आत्मा हैं। यदि राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो राम कथा और कृष्ण कथा चलती रहेंगी। यदि संस्कृति का संरक्षण नहीं किया गया तो जहां आज कथाएं हो रही हैं, वहां भी बंद हो सकती हैं। इसी कारण आज राम कथा और कृष्ण कथा के साथ-साथ राष्ट्र कथा की अत्यधिक आवश्यकता है।
संविधान मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं
संविधान पर अपने विचार रखते हुए महाराज जी ने कहा कि हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति है और भारत स्वभाव से हिन्दू राष्ट्र है। जैसे मनुष्य धर्म के लिए नहीं, बल्कि धर्म मनुष्य के लिए है, वैसे ही संविधान मनुष्य के लिए बना है, मनुष्य संविधान के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों के अनुसार संविधान में बदलाव होते रहे हैं और सैकड़ों बार संशोधन किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य मनुष्य के जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और उन्नत बनाना है।
शिक्षार्थी के साथ विद्यार्थी भी बने युवा
युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज ने कहा कि केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन पर्याप्त नहीं है, संस्कारों की शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और विद्या में अंतर है। हमारी सनातन परंपरा केवल शिक्षार्थी बनाने की नहीं रही, बल्कि विद्यार्थी बनाने की रही है।
परीक्षाओं में असफलता और बढ़ते डिप्रेशन के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई भी प्रयत्न अंतिम नहीं होता। अपेक्षित सफलता हर बार नहीं मिलती, लेकिन निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। शॉर्टकट अपनाने से बचें और धैर्य के साथ आगे बढ़ें।
महाराज जी के आगमन पर वैदिक मंत्रोच्चारण, पुष्पवर्षा और आरती के साथ उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर विजय सामा, शशि रंजन गुप्ता, शोभा गुप्ता, सौरभ गुप्ता, अर्पणा गुप्ता, सृष्टि गुप्ता, शौर्य गुप्ता, पुनीत अग्रवाल, सारिका अग्रवाल, पंकज एवं शिप्रा मित्तल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

