ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का विशेष आयोजन, आत्म-शांति का दिया संदेश
लखनऊ | Times of TAJ
ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा 18 जनवरी को संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर पर “विश्व शांति दिवस” का भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य, साधक एवं श्रद्धालु शामिल हुए।

इस अवसर पर आयोजित विशेष सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ राजयोगिनी राधा दीदी ने ब्रह्मा बाबा के जीवन दर्शन, उनके गहन आध्यात्मिक अनुभवों और विश्व-कल्याणकारी दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक साधारण हीरा व्यापारी दादा लेखराज ने वर्ष 1936–37 में प्राप्त दिव्य अनुभवों के माध्यम से मानवता को आत्म-जागरण, नैतिकता और शांति का मार्ग दिखाया।
राधा दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा को द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व ही महाविनाश तथा उसके पश्चात एक पवित्र, शांतिपूर्ण और श्रेष्ठ विश्व की झलक प्राप्त हो गई थी, जो उनके उच्च आध्यात्मिक स्तर का प्रमाण है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 1930 के दशक में, जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर दुर्लभ था, ब्रह्मा बाबा ने संस्था की कमान महिलाओं को सौंपकर नारी सशक्तिकरण का ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने ब्रह्मा बाबा के ट्रस्टीशिप सिद्धांत “मेरा कुछ नहीं, सब ईश्वर का” को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि यह सिद्धांत नेतृत्व और सेवा भावना का सर्वोत्तम मॉडल है।
18 जनवरी 1969 को ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के प्रसंग को स्मरण करते हुए राधा दीदी ने कहा कि यह सामान्य मृत्यु नहीं, बल्कि कर्मातीत अवस्था की पूर्णता थी। उन्होंने बताया कि राजयोग के अभ्यास से व्यक्ति मृत्यु के भय से मुक्त होकर शांत, संतुलित और सशक्त जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह रहा कि विश्व शांति की शुरुआत आत्म-शांति से होती है, और ब्रह्मा बाबा का संपूर्ण जीवन इसी सत्य का जीवंत उदाहरण है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक शांति ध्यान कराया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहन शांति का अनुभव कराया।

