फर्रुखाबाद, विकास भवन सभागार में मंगलवार को उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता देवी ने जनशिकायतों की सुनवाई की। जनसुनवाई के दौरान कुल नौ शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें पारिवारिक विवाद, महिलाओं के उत्पीड़न, बच्चों से जुड़े मामले और पुलिस की निष्क्रियता जैसे गंभीर विषय सामने आए।
पहली शिकायत एक बुजुर्ग महिला की थी, जिन्होंने बताया कि उन्होंने अपने भतीजे का 11 वर्षों तक पालन-पोषण किया, लेकिन संपत्ति हड़पने की नीयत से उसके परिजन बच्चे को बहला-फुसलाकर ले गए। महिला ने आयोग से बच्चे को वापस दिलाने की मांग की।
दूसरी शिकायत में एक महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोस की लड़की ने अपने कपड़े फाड़कर कोतवाली पहुंचते हुए उसके 15 वर्षीय बेटे पर झूठा आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी, जिससे पुलिस उसके बेटे को परेशान कर रही है। यह मामला कादरी गेट थाना क्षेत्र का है। इस पर सदस्य सुनीता देवी ने सीओ सिटी को निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
इसके बाद एक महिला ने शिकायत की कि वह अपनी बालिग पुत्री का विवाह उसकी मर्जी से किसी बेरोजगार युवक से नहीं करना चाहती, जबकि पुत्री स्वयं विवाह के लिए सहमत है। इस मामले में आयोग ने पुत्री को दोपहर 2 बजे उपस्थित होने के निर्देश दिए।
एक अन्य महिला ने शिकायत की कि उसका पुत्र और पुत्रवधू उसे मारते-पीटते हैं, घर के काम कराते हैं और भोजन भी नहीं देते, जबकि मकान उसका स्वयं का है। इस पर सदस्य ने परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से समाधान कराने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान एक पिता अपनी बेटी को लेकर पहुंचे। बेटी ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने उसे घर से निकाल दिया है, घर में प्रवेश नहीं करने दे रहा और किसी प्रकार का खर्च भी नहीं दे रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
राजेपुर थाना क्षेत्र से आए एक युवक ने शिकायत की कि उसकी बहन पिछले एक माह से लापता है, लेकिन पुलिस अब तक उसे खोज नहीं पाई है। युवक का आरोप था कि जिन लोगों से उसकी बहन की बातचीत होती थी, उन्हें भी पुलिस ने नहीं पकड़ा और दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस पर महिला आयोग की सदस्य ने संबंधित तीन युवकों की सीडीआर निकलवाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
एक अन्य महिला ने शिकायत की कि अदालत के आदेश पर उसका पति उसे गुजारा भत्ता देता था, लेकिन अब सेवानिवृत्त होने के बाद वह पेंशन से कोई हिस्सा नहीं दे रहा है। पति पर गबन का आरोप भी है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महिला अदालत में पुनः वाद दायर करने में असमर्थ है। इस पर सदस्य ने बीएसए को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
एक अन्य मामले में महिला ने बताया कि उसके परिजनों और ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया है तथा पति भी उसे रखने से इनकार कर रहा है। इस पर आयोग ने परिवार परामर्श केंद्र के माध्यम से पति को समझाने के निर्देश दिए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
जनसुनवाई के उपरांत महिला आयोग की सदस्य सुनीता देवी ने कहा कि तीन सप्ताह के भीतर सभी शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पिछली जनसुनवाई में आए एक बच्चे के साथ शिक्षक द्वारा मारपीट के मामले की कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। जब उन्होंने अधिकारियों से इस पर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी, तो अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
महिला आयोग द्वारा आयोजित इस जनसुनवाई में सभी संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

