अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने रखा भारत का पक्ष, अमन और सूफ़ी परंपरा का दिया संदेश
रबात/अजमेर, । मोरक्को की राजधानी रबात में आयोजित विश्व के पहले अंतर्राष्ट्रीय सूफ़ीवाद सम्मेलन में भारत की समृद्ध चिश्ती सूफ़ी परंपरा ने विशेष पहचान बनाई। 10 और 11 जून को प्रतिष्ठित अकादेमी दु रोयाम दु मारोक में आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व दरगाह हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज (र.अ.) अजमेर शरीफ के 26वीं पीढ़ी के गद्दीनशीन एवं वंशानुगत क़िलाबरदार हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने किया।
“स्मृति को जागृत करो — भविष्य को आलोकित करो” विषय पर आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर से सूफ़ी विद्वानों, शोधकर्ताओं, आध्यात्मिक गुरुओं और अंतरधार्मिक संवाद के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन का आयोजन अकादेमी दु रोयाम दु मारोक और वलीयात ओएनजी इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

सम्मेलन के दौरान हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने दो महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित किया। “ज्ञान के जवाहरात: सूफ़ीवाद” विषयक सत्र में उन्होंने भारत की सूफ़ी महिलाओं की आध्यात्मिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए हज़रत बीबी राबिया अल-बसरी, हज़रत बीबी हाफ़िज़ा जमाल और हज़रत बीबी फ़ातिमा साम जैसी महान हस्तियों के योगदान को रेखांकित किया।

वहीं “दिल में अमन से दुनिया के अमन तक” विषय पर अपने संबोधन में उन्होंने चिश्ती परंपरा के मूल सिद्धांत “सभी के साथ अमन” का संदेश देते हुए कहा कि अजमेर शरीफ का आठ सौ वर्षों से जारी लंगर मानवता, सेवा और भाईचारे का जीवंत प्रतीक है, जहां बिना किसी भेदभाव के सभी का स्वागत किया जाता है।
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि अमन केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि चिश्ती परंपरा ने सदियों से प्रेम, करुणा और सहअस्तित्व का संदेश दिया है, जिसकी आज विश्व को सबसे अधिक आवश्यकता है।
सम्मेलन में मोरक्को के शाह मोहम्मद षष्ठम के वरिष्ठ सलाहकार आंद्रे अज़ौले, अकादेमी दु रोयाम दु मारोक के स्थायी सचिव अब्देलजलील लहजोमरी तथा वलीयात ओएनजी इंटरनेशनल की संस्थापक कैरोल लतीफा अमीर सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के समापन पर “रबात अपील” जारी की गई, जिसमें वैश्विक संस्थाओं से सूफ़ी परंपरा में महिलाओं की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मानवता की साझा धरोहर के रूप में मान्यता देने, संरक्षित करने और सम्मानित करने का आह्वान किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन में हाजी सैयद सलमान चिश्ती की भागीदारी भारत की सूफ़ी कूटनीति और वैश्विक आध्यात्मिक संवाद में चिश्ती परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। सम्मेलन में तुर्की, फ्रांस, सेनेगल, स्वीडन, दक्षिण अफ्रीका सहित अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर वैश्विक शांति, सहिष्णुता और आध्यात्मिक संवाद को मजबूत करने पर बल दिया।
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— TIMES OF TAJ NEWS DESK

