गयाकॉलेज, गया के उर्दू विभाग में“आधुनिक युग में साहित्यका अर्थ और महत्व”विषय पर एक विशेष व्याख्यान
गया, 9 अप्रैल।साहित्य मनुष्य की आंतरिक दुनिया का आईना होता है और उसे अपनी आत्मा की गहराइयों में झांकने का सलीका देता है। जब कोई व्यक्ति साहित्य का अध्ययन करता है तो वह केवल शब्दों को नहीं पढ़ता, बल्कि विभिन्न अनुभवों, भावनाओं और विचारों से गुजरता है। यही प्रक्रिया उसके भीतर दृष्टि (बसीरत) पैदा करती है, जिससे वह अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझ पाता है। साहित्य दृष्टि, चेतना और बेहतर इंसानियत के निर्माण का एक सशक्त माध्यम है। साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मनुष्य को सोचने पर मजबूर करता है।ये बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार तथा सीएम कॉलेज दरभंगा के वर्तमान प्राचार्य, प्रसिद्ध शोधकर्ता, साहित्यकार और शायर प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने गया कॉलेज, गया के उर्दू विभाग में आयोजित विशेष व्याख्यान“वर्तमान दौर में साहित्य की सार्थकता और महत्व”विषय पर अपने संबोधन में कहीं।उन्होंने आगे कहा कि साहित्य पढ़ने वाला व्यक्ति अधिक संतुलित, गंभीर और गहन चिंतन करने वाला होता है। वह जीवन की समस्याओं को केवल भावनात्मक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि तार्किक और वैचारिक आधार पर समझने की कोशिश करता है। साहित्य पढ़ना इसलिए भी आवश्यक है कि यह मनुष्य के भीतर जिम्मेदारी की भावना को जागृत करता है। जब हम कहानियाँ, उपन्यास या कविता पढ़ते हैं तो हम विभिन्न पात्रों के जीवन, उनके सुख-दुख और उनके निर्णयों का अनुभव करते हैं। इससे हमारे भीतर सहानुभूति, सहिष्णुता और उदारता जैसे गुण विकसित होते हैं, जो एक सभ्य समाज की नींव हैं।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि साहित्य किसी भी समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक पहचान का मूल आधार होता है। साहित्य के बिना न तो समाज अपनी आत्मा को बनाए रख सकता है और न ही अपनी परंपरा और इतिहास को सही रूप में समझ सकता है।
वर्तमान समय के संदर्भ में साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने कहा कि आज का युग तेज़ रफ्तार, भौतिक प्रगति और तकनीकी विस्तार का युग है। मनुष्य भले ही ऊँचाइयों को छू रहा हो, लेकिन भीतर से वह शून्यता और असंतुलन का शिकार हो रहा है। ऐसे समय में साहित्य ही वह माध्यम है, जो मनुष्य को उसकी जड़ों से जोड़ता है और उसे संतुलन तथा संयम का मार्ग दिखाता है।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कथाकार और साहित्य अकादमी के सलाहकार मंडल के सदस्य डॉ. अहमद सगीर ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए कहा कि गया कॉलेज, गया का उर्दू विभाग पिछले कुछ महीनों से काफी सक्रिय हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर मुश्ताक अहमद का व्याख्यान अत्यंत सारगर्भित, तार्किक और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप था। आज के समय में, जब तेज़ रफ्तार जीवन और डिजिटल व्यस्तताओं ने मनुष्य को सतही जानकारी तक सीमित कर दिया है, साहित्य का अध्ययन और भी अधिक आवश्यक हो गया है। यह हमें ठहराव, चिंतन और आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम में एस.एस. कॉलेज, जहानाबाद के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद इमरान अरशद ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया और कहा कि साहित्य मनुष्य को न केवल बेहतर सोचने की क्षमता देता है, बल्कि उसे एक जिम्मेदार, जागरूक और संवेदनशील इंसान भी बनाता है। यही कारण है कि साहित्य का अध्ययन हर युग में महत्वपूर्ण रहा है और आगे भी मानव विकास के लिए अनिवार्य रहेगा।
विशेष व्याख्यान से पूर्व उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल हई ने अतिथि वक्ता का शॉल और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया तथा उनका परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने इस व्याख्यान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के मशीनी युग में साहित्य की सार्थकता को समझना अत्यंत आवश्यक है। साहित्य केवल पढ़ने की वस्तु नहीं है, बल्कि इसे जीवन में उतारना भी जरूरी है।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद मिनहाजुद्दीन ने किया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर मुश्ताक अहमद का व्यक्तित्व परिचय का मोहताज नहीं है; वे एक कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ आलोचक, शोधकर्ता, साहित्यकार, शायर और साहित्यिक पत्रकार के रूप में देशभर में प्रसिद्ध हैं। उनके आगमन से विभाग को गौरव प्राप्त हुआ है।

