लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण परिवहन को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन सेवा 2026 के तहत अब 15 से 28 सीटों वाली निजी मिनी बसें गांव से जिले तक बिना परमिट संचालित की जा सकेंगी। हालांकि, इन बसों को दूसरे जिले में जाने की अनुमति नहीं होगी।
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के करीब 59 हजार गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ना है। परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है।
क्या होंगे नियम?
- मिनी बसों के संचालन की पूरी जिम्मेदारी वाहन स्वामी पर होगी
- ड्राइवर और कंडक्टर की नियुक्ति भी वाहन मालिक ही करेगा
- किराया और टिकट व्यवस्था भी मालिक तय करेगा
- परमिट की जरूरत नहीं होगी, लेकिन टैक्स देना अनिवार्य रहेगा
कितनी बसें चलेंगी?
सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के 825 विकासखंडों में कम से कम 2 बसें चलाई जाएं। इस हिसाब से 1600 से अधिक मिनी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।
क्या बदला?
पहले इस योजना में बसों को टैक्स और परमिट दोनों से छूट देने की बात कही गई थी, लेकिन अब संशोधन करते हुए केवल परमिट से छूट दी गई है। टैक्स नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
क्यों है खास?
यह पहली बार है जब परिवहन निगम ऐसी योजना ला रहा है जिसमें पूरी जिम्मेदारी निजी वाहन स्वामी को दी गई है। इससे:
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा
- गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी
- छोटे स्तर पर निजी परिवहन को बढ़ावा मिलेगा
यह योजना लागू होने के बाद गांवों में सफर करना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।

