नई दिल्ली। सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन यह पूरी तरह सच है कि केंद्र सरकार गधा, घोड़ा और ऊंट पालन के लिए लाखों रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। घटती संख्या को देखते हुए इन पशुओं को राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना में शामिल किया गया है।
सरकार का उद्देश्य है—इनकी नस्ल को बचाना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाना और पशुपालन को एक संगठित उद्योग का रूप देना।
📉 60% घट गई गधों की संख्या
सरकारी आंकड़ों (2019 की 20वीं पशुगणना) के मुताबिक देश में अब केवल करीब 1.23 लाख गधे बचे हैं। वर्ष 2012 के मुकाबले इनकी संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पहले गधों का उपयोग ईंट-भट्टों, निर्माण कार्य और ग्रामीण ढुलाई में होता था। मशीनों और वाहनों के बढ़ते उपयोग से इनकी जरूरत कम होती गई और पालन घटता चला गया।
💰 कितनी मिलेगी मदद?
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत:
संगठित गधा/घोड़ा/ऊंट फार्म खोलने पर अनुदान
नस्ल सुधार और प्रजनन केंद्र के लिए आर्थिक सहायता
कुछ प्रोजेक्ट्स में 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी
राज्य सरकारों को भी नस्ल संरक्षण पर विशेष फंड
यह सहायता परियोजना लागत के निर्धारित प्रतिशत के आधार पर दी जाती है।
🎯 योजना का उद्देश्य
✔ घटती आबादी को बचाना
✔ पारंपरिक नस्लों का संरक्षण
✔ ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार
✔ पशुपालन में विविधता
📌 कौन उठा सकता है लाभ?
व्यक्तिगत पशुपालक
किसान
स्वयं सहायता समूह
स्टार्टअप या फार्मिंग उद्यमी
आवेदन राज्य पशुपालन विभाग या संबंधित पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है।
✍️ Times of TAJ View
जिस गधे को समाज में अक्सर मजाक का पात्र बनाया जाता है, वही आज सरकारी नीति का केंद्र बन गया है। यह योजना दिखाती है कि बदलते दौर में पारंपरिक पशुधन भी आर्थिक अवसर बन सकता है।
यदि सही मार्गदर्शन और पारदर्शिता के साथ इसे लागू किया जाए, तो यह ग्रामीण भारत के लिए आय का नया स्रोत साबित हो सकता है।

