लेखक: तबस्सुम अब्बास
(शिक्षिका एवं सामाजिक चिंतक)
हर साल सर्दियों की धूप में रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में लहराती हैं। छतों पर बच्चों की हँसी, “काटो-काटो” की आवाज़ और त्योहार जैसा माहौल—लेकिन इसी खुशी के बीच एक ख़ामोश खतरा भी उड़ रहा है, चाइनीज मांझा।
यह सिर्फ़ एक धागा नहीं, बल्कि ऐसी अदृश्य तलवार है जो मासूमों, राहगीरों और बेज़ुबान पक्षियों की जान ले रही है।
चाइनीज मांझा: धागा नहीं, ज़हर
चाइनीज मांझा साधारण सूती धागा नहीं होता। इसमें काँच का बुरादा, धातु और केमिकल मिलाए जाते हैं ताकि यह दूसरे की पतंग काट सके। यही तेज़ी इसे जानलेवा बना देती है।
यह त्वचा को रेज़र की तरह काट देता है
हाथ, उंगलियाँ, चेहरा और गर्दन तक गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं
कई मामलों में यह मौत का कारण भी बन चुका है।
सड़क पर मौत का जाल
सोचिए—एक बाइक सवार अपने परिवार के लिए सामान लेकर लौट रहा है। अचानक गर्दन में मांझा फँसता है और पल भर में सब खत्म।
ऐसी घटनाएँ अब सिर्फ़ ख़बर नहीं रहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई बन चुकी हैं।
पक्षियों का दर्द कोई नहीं सुनता
आसमान में उड़ते परिंदे इस खतरे को समझ नहीं पाते।
उनके पंख कट जाते हैं
गर्दन में मांझा फँसकर वे तड़पते हैं
कई पक्षी घंटों दर्द में दम तोड़ देते हैं
एक पतंग की जीत, कई परिंदों की हार बन जाती है।
कानून सख्त है, फिर भी लापरवाही क्यों?
देश के कई राज्यों में चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद चोरी-छिपे इसका कारोबार जारी है।
चाइनीज मांझा बेचने या इस्तेमाल करने पर
जुर्माना और जेल तक का प्रावधान है।
फिर सवाल उठता है—क्या थोड़ी सी जीत की खुशी, किसी की जान से बड़ी है?
बच्चों को रोकना नहीं, समझाना ज़रूरी
बच्चों को डाँटने से नहीं, सही तालीम से बदलाव आता है।
उन्हें सिखाइए कि—
मज़ा वही है जिसमें किसी को चोट न पहुँचे
असली समझदारी दूसरों की जान बचाने में है
पतंग खेल है, हथियार नहीं
समाधान हमारे ही हाथ में है
केवल सूती और सुरक्षित मांझा इस्तेमाल करें
खुले मैदान में पतंग उड़ाएँ
इस्तेमाल के बाद मांझा इधर-उधर न फेंकें
चाइनीज मांझा दिखे तो प्रशासन को सूचना दें
एक छोटा संकल्प, बड़ा बदलाव
अगर हर परिवार और हर बच्चा यह ठान ले कि
“हम चाइनीज मांझा का इस्तेमाल नहीं करेंगे”
तो न सड़कें लहूलुहान होंगी, न आसमान सूना लगेगा।
आख़िरी बात
पतंग उड़ाइए, खुशियाँ मनाइए—
लेकिन याद रखिए,
एक खतरनाक धागा किसी की पूरी ज़िंदगी काट सकता है।
अगर यह लेख आपको सोचने पर मजबूर करे,
तो इसे आगे साझा ज़रूर कीजिए—
क्योंकि जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

