नई दिल्ली: द्रौपदी मुर्मू ने ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ को अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह विधेयक कानून बनने की दिशा में एक अहम कदम बन गया है। कानून मंत्रालय ने 30 मार्च को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
नए संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत उनके खिलाफ शारीरिक क्षति पहुंचाने वाले अपराधों के लिए क्रमिक दंड (Graduated Penalties) का प्रावधान किया गया है, जिससे अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा तय की जा सके।
हालांकि, इस विधेयक को लेकर संसद में तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्षी सांसदों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि इसमें समलैंगिक पुरुष (गे) और समलैंगिक महिलाएं (लेस्बियन) को शामिल नहीं किया गया है, जिससे यह कानून सीमित दायरे में रह जाता है।
विधेयक में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है—एक विशेष प्राधिकरण का गठन, जो यह तय करेगा कि कोई व्यक्ति ट्रांसजेंडर की श्रेणी में आता है या नहीं। इस व्यवस्था पर भी विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह आत्म-पहचान (Self-identification) के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य उन लोगों को सुरक्षा देना है जो सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से ट्रांसजेंडर के रूप में पहचाने जाते हैं और लंबे समय से भेदभाव का सामना कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष ने मांग की कि इस विधेयक को और व्यापक चर्चा के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए था।
संशोधित विधेयक में “ट्रांसजेंडर” शब्द की स्पष्ट परिभाषा दी गई है और यह भी कहा गया है कि विभिन्न यौन अभिविन्यास (sexual orientation) और स्व-परिकल्पित लैंगिक पहचान (self-perceived gender identity) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
कानून मंत्रालय के अनुसार, यह अधिनियम केंद्र सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय की गई तिथि से लागू होगा।

