संवाद।। तौफीक फारूकी
फर्रुखाबाद। पांचाल घाट स्थित श्री रामनगरिया मेले में खोया-पाया सेवा शिविर के तत्वावधान में रविवार को संत-महात्मा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिनेश कुमार तथा मेला समिति के वरिष्ठ सदस्य विजय मिश्र ने सहभागिता की।

समारोह का शुभारंभ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित रामसेवक मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके उपरांत जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी न्यायिक और विजय मिश्र द्वारा उपस्थित संत-महात्माओं को शॉल ओढ़ाकर व माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने खोया-पाया सेवा शिविर के संरक्षक ओमकार नाथ त्रिपाठी को भी शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

समारोह को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म में वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित है, न कि जाति आधारित। उन्होंने कहा कि बाहरी आक्रांताओं द्वारा इस व्यवस्था को जातिगत रूप में प्रस्तुत कर भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

डीएम ने आदि शंकराचार्य द्वारा देश के चारों कोनों में मठों की स्थापना को भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि संत समाज सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य करता रहा है।

जिलाधिकारी ने रामनगरिया मेले को जन-जन का मेला बताते हुए कहा कि मां भागीरथी के पावन तट पर लगने वाला यह मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम आयोजक विजय मिश्र ने जिलाधिकारी एवं मेला सचिव को शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि गंगा तट पर धर्म, कर्म और सेवा के कार्य से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि रामनगरिया मेला प्रयागराज मेला के बाद गंगा तट पर लगने वाला दूसरा सबसे बड़ा मेला है, जहां विभिन्न जनपदों से श्रद्धालु गंगा स्नान और कल्पवास के लिए पहुंचते हैं।
विजय मिश्र ने खोया-पाया सेवा शिविर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत मेला के संस्थापक सदस्य एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय पंडित रामसेवक मिश्र द्वारा की गई थी, जो आज भी मानव सेवा की मिसाल बना हुआ है।
कार्यक्रम का संचालन दीपिका त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर स्वामी रामानंद सरस्वती, सुखदेव स्वरूप, ओमास्वरूप, रामकेवाल महाराज, उषा दुबे, मृत्युंजय शर्मा, अरविंद अग्निहोत्री, मनोज गंगवार, राजेश पाठक, शकुंतला देवी, सौरभ त्रिपाठी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

