उत्तर प्रदेश की स्कूल बसों और अन्य स्कूल वाहनों की सुरक्षा जांच के लिए चलाया गया अभियान अभी तक अधूरा पड़ा है। प्रदेश के 75 जिलों में से केवल 25 जिलों में ही स्कूल वाहनों का शत-प्रतिशत ब्योरा पोर्टल पर दर्ज किया जा सका है, जबकि बाकी 50 जिलों में कार्य अब भी लंबित है।
परिवहन और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से निजी एवं अनुबंधित स्कूल वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों का डेटा एकत्र कर रहे हैं, लेकिन तय समय सीमा के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका। अब गर्मी की छुट्टियों में स्कूल बंद होने वाले हैं, जिससे वाहनों की निगरानी और जांच प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।
यह अभियान कासगंज में हुई दर्दनाक घटना के बाद शुरू किया गया था, जहां सात वर्षीय बच्ची स्कूल बस की टूटी फर्श से गिरकर मौत का शिकार हो गई थी। घटना के बाद एक अप्रैल से विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे।

मुख्य सचिव एसपी गोयल ने परिवहन और शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि सभी जिलों के स्कूल वाहनों का पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर फीड किया जाए ताकि डीएम, एसपी, डीआईओएस, बीएसए और परिवहन विभाग सीधे निगरानी कर सकें।

बड़े जिलों में कानपुर नगर, गोरखपुर और गाजियाबाद में 100 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। वहीं वाराणसी में 99.36 प्रतिशत, आगरा, अलीगढ़ और मेरठ में करीब 98 प्रतिशत, प्रयागराज में 97.21 प्रतिशत, लखनऊ में 95.36 प्रतिशत और मुरादाबाद में 92.63 प्रतिशत वाहनों का डेटा दर्ज किया गया है।
परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों की निगरानी के लिए अलग पोर्टल तैयार किया है, जिससे प्रशासनिक अधिकारी वाहनों की सुरक्षा और वैध दस्तावेजों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर सकें।

