नई दिल्ली: जमीअत उलेमा-ए-हिंद ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अज़ीम सिपाही मुफ़्ती किफ़ायतउल्लाह देहलवी को याद करते हुए कांस्टिट्यूशन क्लब, दिल्ली में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया।

इस अवसर पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस द्वारा मुफ़्ती साहब को “भारत की जंगे आज़ादी का बहादुर रहनुमा” बताया गया। सेमिनार में अंतर्राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन संसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि मुफ़्ती साहब ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में अद्वितीय बहादुरी दिखाई और भारत की एकता के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि जब सुभाष चंद्र बोस जापान जा रहे थे, तब उन्होंने मुफ़्ती साहब के घर तीन दिन तक शरण ली थी। उन्होंने विशेष रूप से यह भी बताया कि मुफ़्ती साहब ने मुस्लिम लीग के विभाजनवादी एजेंडों का विरोध किया और हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की, जो आजादी की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण संदेश था।
सेमिनार में मुफ़्ती साहब की बहादुरी, उनके दृष्टिकोण और आज तक प्रासंगिक सामाजिक सद्भाव के संदेश को याद किया गया।

