अस्पताल के बिस्तर से दी आख़िरी अज़ान, दुनिया भर के मुसलमानों की आँखें नम
मदीना मुनव्वरा। मस्जिद-ए-नबवी ﷺ के वरिष्ठ और बेहद सम्मानित मुअज्जिन शेख फैसल अल-नुमान का इंतिक़ाल हो गया। उनके इंतिक़ाल की ख़बर से पूरी इस्लामी दुनिया ग़म और अफ़सोस में डूब गई है। शेख फैसल अल-नुमान एक ऐसी रूहानी शख़्सियत थे, जिनकी अज़ान की सदा ने दशकों तक दुनिया भर के मुसलमानों के दिलों को सुकून और सुक़ूत अता किया।
शेख फैसल अल-नुमान ने महज़ 14 साल की उम्र में मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में अज़ान देने की ख़िदमत शुरू की थी। इतनी कम उम्र में इस अज़ीम ज़िम्मेदारी को संभालना उनके इख़लास, परहेज़गारी और अल्लाह से गहरे ताल्लुक़ का सुबूत था। उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अज़ान की अमानत को पूरी अकीदत और एहसास के साथ निभाया।
उनकी ज़िंदगी का सबसे जज़्बाती और रूह कंपा देने वाला लम्हा तब सामने आया, जब बीमारी की हालत में भी उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से अपनी आख़िरी अज़ान दी। यह मंज़र देखकर हर सुनने वाली आँख नम हो गई और हर दिल अल्लाह की याद में झुक गया।
शेख फैसल अल-नुमान की आवाज़ सिर्फ़ अज़ान नहीं थी, बल्कि ईमान को ताज़ा करने वाली एक रूहानी पुकार थी, जो मदीना से निकलकर पूरी दुनिया के मुसलमानों के दिलों तक पहुँचती थी। उनकी यह ख़िदमत और रूहानी विरासत हमेशा याद रखी जाएगी।
अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन करे और उनके अहले-ख़ानदान व चाहने वालों को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।
आमीन या रब्बुल आलमीन।

