आगरा। विश्व पुस्तक दिवस के उपलक्ष्य में 26 अप्रैल 2026 को ताज लिटरेचर क्लब, आगरा द्वारा आगरा पब्लिक स्कूल ऑडिटोरियम, विजय नगर कॉलोनी में एक भव्य साहित्य महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आगरा सहित विभिन्न शहरों से आए प्रतिष्ठित कवि-कवयित्रियों और साहित्यकारों ने भाग लेकर आयोजन को गरिमामय बनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हाथरस से पधारे आशु कवि अनिल बोहरे, अध्यक्ष महेश चंद्र शर्मा, संस्थापक राजकुमार शर्मा, तथा संस्था अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित व माल्यार्पण कर किया गया। इसके पश्चात स्वामी लीला शाह सरस्वती विद्या मंदिर के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
स्वागत उद्बोधन में संस्था अध्यक्ष भावना वरदान शर्मा ने बताया कि 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को पुस्तकों के प्रति प्रेरित करना है। इसी क्रम में ताज लिटरेचर क्लब द्वारा इस भव्य साहित्य महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा और पुस्तक प्रदर्शनी जैसी गतिविधियां शामिल रहीं।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. अरविंद कपूर की अंग्रेजी कविता संग्रह “एजिस ऑफ क्रीसेंडो” का विमोचन भी किया गया, जिसमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित कविताओं का संकलन प्रस्तुत किया गया है।
काव्य संध्या में आगरा के अलावा हाथरस, अकोला, दिल्ली, फिरोजाबाद और मथुरा से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उनकी कविताओं का पाठ कर श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
विशिष्ट अतिथि के रूप में अकोला से कवयित्री अंशु छोकर, अमरीश नाथ और राजीव निस्पृह उपस्थित रहे। काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवियों में सुषमा सिंह, राजेंद्र मिलन, अशोक अश्रु, डॉ. शशी गुप्ता, ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’, प्रभुदत्त उपाध्याय, अमिता त्रिपाठी, विजया तिवारी, कामेश मिश्रा ‘सनसनी’, चारुमित्रा, रश्मि जैन, महक, शेषपाल सिंह, संजय गुप्त, अशोक गोयल, डॉ. ऊषा गिल और अशोक अग्रवाल सहित अन्य कवियों ने वीर, श्रृंगार और ओजपूर्ण कविताओं से श्रोताओं का दिल जीत लिया।
कवयित्री अंशु छोकर ने अपनी पंक्तियों से विशेष प्रभाव छोड़ा—
“हाड़ी रानी पन्नाधाय, पद्मिनी सी कहानी चाहिए,
आज की बेटी में संस्कारों की रवानी चाहिए।
चूड़ी वाले हाथों से जमकर तलवारें थाम लो,
हर बेटी में लक्ष्मीबाई सी जवानी चाहिए।”
मुख्य अतिथि अनिल बोहरे ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से कहा कि “कवि की कविता सुनना जरूरी है और अच्छा पति बनने के लिए पत्नी की सुनना भी जरूरी है”, जिस पर सभागार में ठहाके गूंज उठे। वहीं मीना शर्मा ने अपनी पंक्तियों—
“दिल की नगरिया आना, आकर के फिर ना जाना,
रहता है मोती जैसे सीप मेरे साजना।”
—से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन अनुपमा दीक्षित ने प्रभावशाली ढंग से किया। समारोह में कार्तिकेय, अर्चना कपूर, चतुर्भुज तिवारी, जगन प्रसाद तेहरिया, गिराज दीक्षित, आनंद राय, नीतू तेहरिया, हेमलता, शैलेन्द्र शर्मा, सुमित भारद्वाज सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए ऐसे साहित्यिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।

