बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद स्थित प्रसिद्ध देवा शरीफ दरगाह में सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर खेली जाने वाली 120 साल पुरानी ऐतिहासिक होली की परंपरा इस वर्ष टूटने की आशंका जताई जा रही है।
वारिस होली कमिटी के अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी (62) ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर उम्र और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए आयोजन की जिम्मेदारी उठाने में असमर्थता जताई।
उल्लेखनीय है कि वह पिछले लगभग 40 वर्षों से इस सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक आयोजन का नेतृत्व करते आ रहे हैं।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि “परिवर्तन समय का नियम है” और अब नई पीढ़ी को आगे आकर जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नई कमिटी का गठन किया जाता है तो वह मार्गदर्शन देने के लिए सदैव उपलब्ध रहेंगे।
इधर देवा नगर के हिंदू समाज के लोगों ने पुरोहित अवध किशोर को अध्यक्ष चुनते हुए “देवा होलिकोत्सव समिति” का गठन किया है। अवध किशोर ने बताया कि पुरानी कमिटी के साथ शनिवार को बैठक के बाद ही आगे की रणनीति और औपचारिक घोषणा की जाएगी।
देवा शरीफ की होली वर्षों से गंगा-जमुनी तहज़ीब और भाईचारे की अनूठी मिसाल रही है, जहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर रंगों का त्योहार मनाते रहे हैं। अब सभी की निगाहें आगामी बैठक पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि इस वर्ष यह ऐतिहासिक परंपरा किस रूप में आगे बढ़ेगी।
— Times of Taj Desk

