आगरा। हज़रत अमीरुल मोमिनीन, शेर-ए-ख़ुदा, इमाम मौला अली इब्ने अबू तालिब अलैहिस्सलाम की यौम-ए-विलादत के मौके पर ईदगाह कटघर स्थित दरगाह आले पंजतनी पीर अलहाज तसद्दुक हुसैन शाह अलमारूफ़ रमज़ान अली शाह चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह में अकीदत और एहतराम के साथ तकरीब मुनक़्क़िद की गई।
इस अवसर पर गुलपोशी, इत्रपाशी, फ़ातिहा ख़्वानी की गई और मुल्क में अमन-ओ-अमान, भाईचारे तथा हाज़रीन की फ़लाह-ओ-बहबूदी के लिए ख़ुसूसी दुआ की गई। दुआ दरबार के सज्जादानशीन पीरज़ादा ज़ैनुल आबेदीन अलमारूफ़ विजय कुमार जैन ने अकीदतमंदों की मौजूदगी में कराई।
फ़ातिहा के बाद अपने ख़िताब में सज्जादानशीन ने कहा कि हज़रत इमाम मौला अली अलैहिस्सलाम जानशीन-ए-रसूल, सुल्तान-उल-औलिया, इमाम-उल-औलिया और शहंशाह-ए-तरीक़त-ओ-विलायत हैं। आप हक़, इंसाफ़ और सदाक़त के पैकर हैं तथा तमाम इंसानियत के लिए रहनुमा और मिसाल हैं। आप दिलों के सुकून और रूह के इत्मिनान का सबब हैं।
इस मौके पर बारगाह में ख़िराज-ए-अक़ीदत के तौर पर अशआर पेश किए गए:
उखाड़ा कुव्वत-ए-बाज़ू से जिसने बाब-ए-ख़ैबर को,
अली मुर्तज़ा सा मर्द-ए-बाईमान पैदा कर।
महफ़िल रसूल-ए-पाक की चर्चा अली का है,
लैब हैं नबी के और क़सीदा अली का है।
जन्नत अली की, खाना-ए-काबा अली का है,
जो कुछ है मुस्तफ़ा का, वो सारा अली का है।
फ़ातिहा और दुआ के बाद अकीदतमंदों में लंगर तकसीम किया गया।
योम-ए-विलायत के जश्न में विशेष रूप से सज्जादानशीन पीरज़ादा विजय कुमार जैन, ख़लीफ़ा रमज़ान ख़ान साबरी, ख़लीफ़ा कल्लू साबरी, ख़लीफ़ा जमील साबरी, ख़लीफ़ा सईद साबरी, सुल्तान भाई, राकेश चंदेल साबरी, उमेश चंदेल साबरी, भूपेन्द्र चंदेल साबरी, हाजी यासीन ख़ान, शकील साबरी, गुलशन चंचल, हफ़ीज़ साबरी, बबलू भाई, फरहान साबरी, नीरज, रूप सिंह साबरी, शिवानी साबरी, गायत्री साबरी सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

