लखनऊ। उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था तेजी से नए आयाम छू रही है। जो विश्वविद्यालय कभी National Assessment and Accreditation Council (NAAC) की रैंकिंग में बी और बी-प्लस ग्रेड तक सीमित रहते थे, वही अब ए प्लस और ए डबल प्लस जैसी उत्कृष्ट ग्रेडिंग हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ा रहे हैं।
अब सरकार की नजर डिग्री कॉलेजों को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने पर है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर के कॉलेज प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं में उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च, डिजिटल एजुकेशन, नवाचार और छात्र सुविधाओं को मजबूत करने के गुर सिखाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नई शिक्षा नीति और आधुनिक शैक्षणिक सुधारों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। विश्वविद्यालयों की बेहतर रैंकिंग से छात्रों का भरोसा बढ़ा है और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान मिल रही है।
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के कई कॉलेज और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इससे छात्रों को प्रदेश में ही विश्वस्तरीय शिक्षा का माहौल मिल सकेगा।

