खाली स्कूलों में 177 शिक्षक तैनात, जबकि हजारों विद्यालयों में शिक्षक की भारी कमी से प्रभावित हो रही पढ़ाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर प्रदेश में 313 सरकारी विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, इसके बावजूद इन स्कूलों में 177 शिक्षक तैनात हैं। वहीं दूसरी ओर 7,874 सरकारी विद्यालय ऐसे हैं, जहां पूरे स्कूल की पढ़ाई सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है।
इन आंकड़ों ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों के असंतुलित वितरण और संसाधनों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां छात्रविहीन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती बनी हुई है, वहीं हजारों विद्यालयों में एकमात्र शिक्षक को सभी कक्षाओं की पढ़ाई के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों की तैनाती का युक्तिसंगत पुनर्वितरण किया जाए तो प्रदेश के हजारों विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। वहीं अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित करना समय की आवश्यकता है।

