बीजिंग/नई दिल्ली। भारत समेत दुनिया के कई देशों में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले ने भी देशभर में छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे माहौल में चीन की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा “गाओकाओ” अपनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी प्रणाली के कारण दुनिया भर में मिसाल मानी जाती है।
Gaokao को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। हर वर्ष लगभग 1.3 करोड़ छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसी परीक्षा के परिणाम के आधार पर उन्हें चीन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिलता है।
गाओकाओ परीक्षा की सबसे बड़ी खासियत इसकी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था है। प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। परीक्षा से कई महीने पहले विशेषज्ञों और शिक्षकों की एक विशेष टीम को अलग-थलग सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया जाता है, जहां उनका बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है। यहां तक कि उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए जाते हैं।
प्रश्नपत्रों की छपाई सामान्य प्रिंटिंग प्रेस में नहीं, बल्कि उच्च सुरक्षा वाले विशेष केंद्रों और जेल प्रिंटिंग यूनिट्स में की जाती है। वहां मौजूद कर्मचारियों को परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक बाहर जाने की अनुमति नहीं होती। प्रश्नपत्रों को जीपीएस युक्त विशेष वाहनों में सशस्त्र पुलिस सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है।
परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी जाती है। कई क्षेत्रों में सड़कों को बंद कर दिया जाता है तथा ड्रोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के आसपास “नो-फ्लाई ज़ोन” घोषित कर दिया जाता है।
नकल रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। परीक्षा केंद्रों में हाई-टेक सिग्नल जैमर लगाए जाते हैं, जिससे मोबाइल फोन, ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निष्क्रिय हो जाते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और फेस रिकग्निशन तकनीक से लैस कैमरे परीक्षा हॉल में छात्रों की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं।
चीन में परीक्षा नियमों के उल्लंघन पर बेहद कठोर सजा का प्रावधान है। नकल करते पकड़े जाने पर छात्र को तीन वर्षों तक किसी भी राष्ट्रीय परीक्षा में शामिल होने से प्रतिबंधित किया जा सकता है। वहीं प्रश्नपत्र लीक करने या संगठित नकल में शामिल लोगों को सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, सख्त निगरानी और कठोर कानूनों के संयुक्त प्रयोग ने चीन की गाओकाओ परीक्षा को दुनिया की सबसे सुरक्षित परीक्षा प्रणालियों में शामिल कर दिया है, जहां पेपर लीक होना लगभग असंभव माना जाता है।

