हर वर्ष 17 मई को पूरी दुनिया में विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस मनाया जाता है। यह दिवस आधुनिक संचार तकनीकों के महत्व, डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार और सूचना तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। आज का युग सूचना और तकनीक का युग है, जहां मोबाइल फोन, इंटरनेट, सैटेलाइट संचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पूरी दुनिया को एक वैश्विक गांव में बदल दिया है। ऐसे समय में यह दिवस और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
दिवस मनाने का उद्देश्य
इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को दूरसंचार तकनीकों और सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व के प्रति जागरूक करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। डिजिटल क्रांति ने शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, बैंकिंग, शासन और मीडिया सहित हर क्षेत्र को नई दिशा दी है।
इतिहास और पृष्ठभूमि
विश्व दूरसंचार दिवस मनाने की शुरुआत 17 मई 1865 को हुई, जब अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की स्थापना की गई थी। बाद में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व को देखते हुए इसे “विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस” के रूप में मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीकों के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
आधुनिक जीवन में दूरसंचार की भूमिका
आज दूरसंचार केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह विकास का आधार बन चुका है। इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने दुनिया को अभूतपूर्व गति दी है। ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी को आसान और तेज बना दिया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान दूरसंचार सेवाओं की उपयोगिता और अधिक स्पष्ट हुई। स्कूलों की ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल हेल्थ सेवाओं ने यह साबित किया कि तकनीक संकट के समय समाज को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम बन सकती है।
डिजिटल इंडिया और भारत की प्रगति
भारत में भी डिजिटल क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार की “डिजिटल इंडिया” जैसी योजनाओं ने गांवों तक इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग ऑनलाइन बैंकिंग, सरकारी योजनाओं और डिजिटल शिक्षा का लाभ उठा रहे हैं।
5G तकनीक, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और सस्ते इंटरनेट डेटा ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में शामिल कर दिया है। इससे रोजगार, स्टार्टअप और नवाचार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
चुनौतियां भी कम नहीं
तकनीकी विकास के साथ कई चुनौतियां भी सामने आई हैं। साइबर अपराध, डेटा चोरी, फेक न्यूज, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल असमानता जैसी समस्याएं गंभीर चिंता का विषय हैं। आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग इंटरनेट और डिजिटल शिक्षा से वंचित है। इसलिए आवश्यक है कि तकनीक के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा दिया जाए।
विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस हमें यह संदेश देता है कि तकनीक केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और विकास का मजबूत आधार है। जरूरत इस बात की है कि डिजिटल संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी, पारदर्शिता और समानता के साथ किया जाए, ताकि हर व्यक्ति सूचना क्रांति का लाभ उठा सके और एक समावेशी डिजिटल समाज का निर्माण हो सके।
लेखक – अज़हर उमरी
(वरिष्ठ पत्रकार )

