हज़रत सैय्यद शाह अब्दुल ग़फ़ूर उर्फ बाबा कपूर ग्वालियरी रहमतुल्लाह अलैह
आपकी पाक ज़ात तसव्वुफ़ और विलायत की रोशन मिसाल है। आपका अस्ल वतन कालपी (उत्तर प्रदेश) रहा। इल्म-ए-दीन हासिल करने के बाद आपने मुर्शिद-ए-कामिल की तलाश में सफर किया और आख़िरकार हज़रत सैय्यद मोहम्मद शाह राजे दहेलवी रहमतुल्लाह अलैह के दस्त-ए-हक़ पर बैअत की। आपका सिलसिला तीन वासितों से हज़रत सैय्यद बदीउद्दीन अहमद, पिर ज़िंदा शाह मदार रज़ियल्लाहु अन्हु से जुड़ता है।

बैअत के बाद आपने खुद को इबादत, रियाज़त और मुजाहिदे में डुबो दिया। आपके दिल को नूर-ए-इलाही से ऐसा उजाला मिला कि करामात का ज़ुहूर आम हो गया। आपके मुर्शिद ने आपकी रूहानी तरक्की से खुश होकर आपको अपना जानशीन मुक़र्रर किया।
इसके बाद आप ग्वालियर तशरीफ़ लाए, जहाँ आपकी खानकाह रूहानियत का मरकज़ बनी। आप मज्ज़ूबाना कैफ़ियत में रहने वाले बुज़ुर्ग थे, लेकिन कश्फ़ व करामात में बुलंद मुक़ाम रखते थे। आपके कई ख़लीफ़ा हुए, जिनमें से सात साहिबे-सिलसिला व अहले-इरशाद बने और हर एक से एक सिलसिला जारी हुआ।
📍 दरगाह शरीफ़: ग्वालियर
📅 उर्स की तारीख़: 13 ज़िल-क़ादा
✨ मशहूर वाक़िया: बादशाह अकबर और बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह
एक बार मुग़ल बादशाह अकबर ने आपकी ख़िदमत में कीमती जवाहरात बतौर तोहफ़ा भेजे। उस वक़्त आप जज़्ब की हालत में थे और सामने धूनी जल रही थी। आपने फरमाया:
“फ़क़ीर को दौलत से क्या गरज़!”
और सारे जवाहरात धूनी में डाल दिए — जो जलकर राख हो गए।
जब यह खबर अकबर तक पहुँची तो उसने नाराज़ होकर तोहफ़े वापस मंगवाए। जब कारिंदा फिर हाज़िर हुआ, तो आपने अपनी गुदड़ी उठाकर फरमाया:
“दम मदार, बेड़ा पार!”
और उसी गुदड़ी से तमाम जवाहरात सही-सलामत निकल आए।
यह करामत देखकर हर कोई हैरान रह गया।
बादशाह अकबर खुद ग्वालियर आया, मगर आपने उसकी तरफ़ नज़र तक नहीं उठाई। बाद में मशहूर संगीतकार तानसेन की सिफ़ारिश पर आपने एक शर्त रखी कि बादशाह उसकी जूती अपने सिर पर रखकर आए। अकबर ने अदब के साथ यह शर्त क़बूल की, तब जाकर आपने उसे माफ़ फ़रमाया।
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह की ज़िंदगी हमें यह सबक देती है कि:
असली इज़्ज़त और ताक़त सिर्फ़ अल्लाह की है।
फ़क़ीरी में ही असली बादशाहत है
तकब्बुर इंसान को गिरा देता है, और अदब उसे बुलंद करता है
अल्लाह तआला हमें इन औलिया-ए-किराम के नक्शे-कदम पर चलने की तौफ़ीक़ अता फरमाए और उनके फ़ैज़ से हमारी ज़िंदगियों को रोशन करे।
आमीन या रब्बुल आलमीन
✍️ दुआगो: ज़हीरुद्दीन, आशिकाने मदार

